बच्चों में दो सप्ताह से अधिक बुखार-खांसी हो तो कराएं टी.बी. जांच

बच्चों में दो सप्ताह से अधिक बुखार-खांसी हो तो कराएं टी.बी. जांच

मेडिकल अफसरों को दिया गया बाल टीबी प्रबंधन का प्रशिक्षण

सीएमओ सभागार में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत कार्यशाला आयोजित

 

बहराइच 09 जुलाई। बच्चों में लगातार बुखार, खांसी या वजन कम होने जैसे लक्षणों को सामान्य कमजोरी मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। ऐसे मामलों में बिना देरी किए समय पर टीबी की जांच कराना बेहद जरूरी है। यह बात गुरुवार को सीएमओ कार्यालय सभागार में आयोजित राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के एक दिवसीय प्रशिक्षण सत्र में विशेषज्ञों ने कही। वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर्स (डब्ल्यूएचपी) के पीडियाट्रिक प्रोग्राम के तहत जिले के मेडिकल अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया गया।

प्रशिक्षण में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एम.एल. वर्मा, मास्टर ट्रेनर डॉ. परितोष तिवारी तथा डब्ल्यूएचओ कंसलटेंट डॉ. दीपक चतुर्वेदी ने चिकित्सकों को बाल टीबी के निदान, स्क्रीनिंग और उपचार प्रबंधन की नवीनतम तकनीकों से अवगत कराया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि बच्चों में टीबी की पुष्टि के लिए उम्र के अनुसार सही सैंपल कलेक्शन और आधुनिक जांच तकनीकों का उपयोग बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि शुरुआती अवस्था में ही बीमारी की पहचान कर इलाज शुरू किया जा सके।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एम.एल. वर्मा ने कहा कि बच्चों में टीबी के लक्षण अक्सर वयस्कों की तरह स्पष्ट नहीं होते। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि यदि किसी बच्चे को दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार बुखार रहे, दवा के बाद भी खांसी ठीक न हो, या पिछले तीन महीनों में वजन लगातार घट रहा हो, तो तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराएं। इसके अलावा, यदि परिवार में कोई सदस्य फेफड़ों की टीबी से पीड़ित है और बच्चा उसके संपर्क में रहा है, तो भी उसकी जांच अनिवार्य रूप से कराई जानी चाहिए।

डॉ. वर्मा ने बताया कि बच्चों में होने वाली टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में टीबी की जांच, दवाएं और पूरा उपचार निःशुल्क उपलब्ध है। अभिभावकों को बिना किसी संकोच के समय पर जांच व इलाज के लिए आना चाहिए। इस मौके पर वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर्स के प्रतिनिधियों सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी व कर्मचारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

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