महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। सनातन संस्कृति की गौरवमयी परंपरा को अक्षुण्ण रखने और संस्कृत भाषा के संरक्षण के संकल्प के साथ, आज दिनांक 9 जुलाई 2026 को विप्र संजीवनी परिषद गुरुकुल, अयोध्या में भव्य सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार का आयोजन किया गया। यह पावन अनुष्ठान डॉ. श्री वत्साचार्य जी महाराज के दिव्य सानिध्य में वैदिक रीति-विधानों के साथ संपन्न हुआ। संस्कृति और संस्कारों का महाकुंभ
इस आयोजन की विशेषता यह रही कि इसमें केवल अयोध्या ही नहीं, बल्कि नेपाल सहित देश के विभिन्न राज्यों और उत्तर प्रदेश के अनेक जनपदों से आए विप्र बटुकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बटुकों के साथ उनके अभिभावक, मूर्धन्य विद्वान आचार्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिससे संपूर्ण गुरुकुल परिसर वेदमंत्रों के उद्घोष और आध्यात्मिक ऊर्जा से गुंजायमान हो उठा। सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण अभियान कार्यक्रम के संयोजक ने बताया कि यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि संस्कृत भाषा और भारतीय वैदिक शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित करने का एक वृहद अभियान है। आधुनिक युग में जब युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से दूर हो रही है, ऐसे आयोजन समाज में संस्कार, नैतिकता और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। समाज में संदेश डॉ. श्री वत्साचार्य जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि यज्ञोपवीत संस्कार बालक को जीवन के अनुशासन और ब्रह्मचर्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने उपस्थित सभी बटुकों को सनातन धर्म के आदर्शों पर चलते हुए समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
इस पुनीत आयोजन के माध्यम से एक बार फिर अयोध्या की धरा ने यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति की नींव हमारे संस्कार और वेद ही हैं। कार्यक्रम में सम्मिलित सभी बटुकों और उनके परिवारों ने इस स्मरणीय अनुभव के लिए विप्र संजीवनी परिषद का हृदय से आभार व्यक्त किया।
[संपादक महोदय से निवेदन: उक्त कार्यक्रम के छायाचित्र और वीडियो समाचार के साथ संलग्न हैं, कृपया इन्हें जनहित में प्रमुखता से प्रकाशित/प्रसारित करने का कष्ट करें।]