यौमे आशूरा दसवीं मोहर्रम के अवसर पर मुंबई की सड़कों पर दिखा इमाम ए हुसैन की अकीदत और मुहब्बत का सैलाब,,,,,,


अनुराग लक्ष्य, 26 जून
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
य ज़ीद मर गया कोई नाम नहीं लेता है,
हुसैन आज भी ज़िंदा हैं इस ज़माने मे,
करिश्मा देखिए कर्बल में जान देकर भी,
हुसैन आज भी ज़िंदा हैं हर फसाने में,,,,
जी हाँ, त्वारीख़ आज भी शहीद है इतिहास आज भी साक्षी है कि ज़ुल्म बहुत वक्त तक अपना परचम नहीं लहरा सकता, उसे एक दिन मिट जाना है और फ़ना हो जाना है। साथ ही उसके बर अक्स हक़ हमेशा ज़िंदा रहता है। और हक़ का ही परचम लहराया । जो रहती दुनिया तक ईमाम ए हुसैन की सदाकत को बुलंद करता रहेगा ।
आज सुबह से ही अगर एक तरफ मुंबई की सड़कों पर ग़म और आंसुओं में डूबे हुसैन के चाहने वाले दरूद ओ सलाम का नज़राना पेश कर रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ 11 बजते बजते हुसैन से अकीदत और मुहब्बत रखने वाले ताज़िए को खिराज अकीदत पेश करते हुए हुसैन के परचम को लहरा कर नाराए तकबीर अल्लाहकबर की सदाएं भी बुलन्द करते नज़र आए।
पुलिस प्रशाशन की चाक चौबंद व्यवस्था के बीच आज जो 10 वीं मोहर्रम का नज़ारा था वोह कर्बला की याद को बखूबी ताज़ा करता हुआ नज़र आया।
मोहम्मद अली रोड, जकरिया रोड, मस्जिद बन्दर, भिवंडी, दादर, भायखला, शिवडी, वडाला रोड, एंटोफिल, सायन, धारावी, माहिम, बांद्रा, सांताक्रुज, जोगेश्वरी, मलाड, कंजूरमार्ग, चीता कैंप, कुर्ला,गोवंडी, सहित मुंबई की हर जानिब से ईमान ए हुसैन की शहादत में नात पाक, मानकबत के साथ उलमा हजरात ने अपनी तकरीरों में ईमाम हुसैन की शहादत और किरदार को भी अपनी तकरीर का अहम हिस्सा बनाया। समाचार लिखे जाने तक मुंबई के हर गोशा गोशा में ताजियों की हुजूम के साथ नारए तकबीर अल्लाहकबर की सदाएं बुलन्द हो रही हैं।
पेशकश,,, सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,,,,