• पशु चिकित्सालय पर कीचड़ से हो कर जाने को मजबूर पशुपालक व कर्मी
कुदरहा, बस्ती। राजकीय पशु चिकित्सालय की स्थिति इन दिनों बद से बत्तर होती जा रही है। कर्मचारियों के अभाव के चलते पशुपालकों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। अस्पताल परिसर चारों तरफ झाड़ियों और घास-फूस से घिरा हुआ है। जिससे यहां आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
राजकीय पशु चिकित्सालय में 170 राजस्व गांव व नगर पंचायत के 10 वार्ड सामिल है। जिसमें बड़े जानवरों में 1800 भैस व 4500 गाय और गोशाला के 190 पशुओं शामिलन है। इसके अलावा छोटे पशु भी है। इनकी देखने के लिए एक चिकित्सक डा फाजिल खान की तैनाती है। यहां फार्माशिष्ट 31 जनवरी 2019 से नही है। जिसका चार्ज कलवारी में तैनात फार्माशिष्ट प्रभात उपाध्याय के पास है। यहां कोई अनुचर भी नही है। इनके अलावा इस केंद्र पर अन्य किसी भी कर्मी की तैनाती नहीं है। सर्वाधिक समस्या जब गंभीर बीमारी से ग्रस्त पशुपालकों के फोन आता है तो उनके दरवाजे पर जाने के लिए या तो किसी को केंद्र पर बैठाएं या फिर ताला बंद करके जाना पड़ता है। पूरा परिसर झाड़ियां से घिरा पड़ा है। इसे साफ कराने के लिए न तो कर्मियों की नजर पड़ रही है और न ही बगल में स्थापित खंड विकास कार्यालय में बैठे एड़ीओं पंचायत की। यहां दिन में ही विषैले जीव जंतु घूमते रहते हैं। भवन 22 जून 2023 को हैंडोवर हुए था। तीन वर्ष में ही जगह-जगह प्लास्टर उखाड़ कर गिर रहा है। कही कही दरार भी पड़ गया है। बाहर की दीवार अधिक क्षतिग्रस्त हो गया है। राम जानकी मार्ग से मुख्य भवन तक जाने के लिए रास्ते में पानी व कीचड़ फैला हुआ है।
पशपालकों ने बताया कि केंद्र पर डाक्टर साहब मिलते हैं। कहीं पशुओं का उपचार करने कही चले जाते हैं उस समय वहा कोई नहीं मिलता है। दवा के रूप में कुछ तो मिल जाते हैं लेकिन जब चिकित्सक घर उपचार करने आते हैं तब तीन से चार सौ देना पड़ता है।
पशु चिकित्साधिकारी डा फजील खान ने बताया कि वर्षों से इक्लौता कर्मी हूं। अनुचर कमलेश सिंह के मौत के बाद कोई नही आया। सात वर्ष से फार्माशिष्ट की भी तैनाती नही है। केंद्र चलाने में बड़ी समस्याएं आ रहे हैं। इसके लिए उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। यहां एक फार्माशिष्ट व दो अनुचर का डिमांड़ किया गया है। परिसर में झाड़ियां की सफाई व इंटर लाकिंग लगवाने के लिए कई बार बीडीओ व एड़ीओं पंचायत से लिखित एवं मौखिक रूप से कहा और आश्वासन भी मिला लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं हो पाया।