लखनऊ।उत्तर प्रदेश सरकार की ‘विद्युत सखी’ योजना ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और अंकीय अभिशासन का एक सफल मॉडल बनकर उभरी है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित इस योजना ने जहां ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली बिल संग्रहण व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाया है, वहीं हजारों महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग भी प्रशस्त किया है।योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को ‘विद्युत सखी’ के रूप में प्रशिक्षित कर स्मार्टफोन और अन्य तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके माध्यम से वे उपभोक्ताओं के घर पहुंचकर बिजली बिलों का संग्रहण करती हैं और तत्काल रसीद उपलब्ध कराती हैं। इससे ग्रामीण उपभोक्ताओं को बिल जमा करने के लिए दूर-दराज स्थित विद्युत उपकेंद्रों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।विद्युत सखियों को उनके द्वारा जमा कराए गए राजस्व के आधार पर प्रोत्साहन राशि दी जाती है। दो हजार रुपये तक के बिल पर 20 रुपये प्रति बिल तथा इससे अधिक राशि के बिलों पर कुल संग्रहित धनराशि का एक प्रतिशत लाभांश प्रदान किया जाता है।योजना की सफलता की मिसाल शामली जनपद के ऊन विकास खंड स्थित हसनपुर गांव की निवासी अनीता हैं। भारती महिला ग्राम संगठन के अंतर्गत संचालित ‘सृष्टि स्वयं सहायता समूह’ की सदस्य अनीता कभी सीमित आय और आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रही थीं। वर्ष 2018 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने सामुदायिक निवेश निधि से ऋण लेकर अपने पति के इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवसाय का विस्तार किया।वर्ष 2022 में विद्युत सखी के रूप में चयनित होने के बाद अनीता ने घर-घर जाकर बिजली बिल संग्रहण का कार्य शुरू किया। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने अब तक सात करोड़ रुपये से अधिक का विद्युत राजस्व संग्रहित किया है। इसके बदले उन्हें सात लाख रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हो चुकी है।वर्तमान में अनीता प्रतिमाह लगभग 20 से 25 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और परिवार ऋणमुक्त हो चुका है। साथ ही समाज में भी उन्हें सम्मानजनक पहचान मिली है।अनीता का कहना है कि विद्युत सखी योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। इस मंच ने उनमें आत्मविश्वास बढ़ाया और समाज में अपनी पहचान बनाने का अवसर प्रदान किया। आज वह अपने क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।प्रदेश सरकार का मानना है कि विद्युत सखी योजना केवल बिजली विभाग के राजस्व संग्रहण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने का प्रभावी अभियान है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ महिला स्वावलंबन की नई इबारत भी लिख रही है।