लखनऊ: थाना सैरपुर पुलिस एवं डीसीपी उत्तरी की क्राइम टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक बड़े अंतरजनपदीय साइबर अपराध गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो मोबाइल चोरी कर उनसे यूपीआई आईडी बनाकर बैंक खातों से लाखों रुपये की ऑनलाइन ठगी को अंजाम दे रहा था। पुलिस ने इस मामले में 05 शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर उनके पास से बड़ी मात्रा में चोरी के मोबाइल फोन, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, नकदी और घटना में प्रयुक्त वाहन बरामद किया है।यह कार्रवाई उस समय शुरू हुई जब 07 जून 2026 को थाना सैरपुर क्षेत्र के कमलाबाद बढ़ौली निवासी एक व्यक्ति ने तहरीर देकर बताया कि अज्ञात व्यक्तियों द्वारा उनका मोबाइल फोन चोरी कर लिया गया और उसी मोबाइल के माध्यम से उनके एसबीआई खाते से ₹1,36,000 तथा पीएनबी खाते से ₹54,000 की अवैध निकासी कर ली गई। तहरीर के आधार पर थाना सैरपुर में मु0अ0सं0-63/2026 धारा 303(2) भारतीय न्याय संहिता एवं 66डी आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपायुक्त उत्तरी के निर्देशन में थाना सैरपुर पुलिस और क्राइम टीम को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके बाद पुलिस टीम ने तकनीकी सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों की पहचान और उनकी गतिविधियों पर नजर रखना शुरू किया।लगातार प्रयासों के बीच 08 जून 2026 को पुलिस को सूचना मिली कि साइबर ठगी में शामिल आरोपी एक सफेद रंग की हुंडई वर्ना कार से गोमती पुल से किसान पथ होते हुए बीकेटी की ओर जा रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी कर वाहन को रोक लिया और उसमें सवार पांचों अभियुक्तों को मौके से गिरफ्तार कर लिया।तलाशी के दौरान पुलिस ने वाहन से 08 मोबाइल फोन, 07 सिम कार्ड, चार्जर, मल्टी चार्जिंग केबल और ₹19,000 नकद बरामद किए, जबकि अभियुक्तों की व्यक्तिगत तलाशी में 07 मोबाइल फोन, 02 एटीएम कार्ड और ₹3,260 नकद बरामद हुआ। वाहन के कागजात प्रस्तुत न किए जाने पर कार को मोटर वाहन अधिनियम के तहत सीज कर दिया गया।गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान सतेन्द्र सिंह उर्फ अजय (24 वर्ष, निवासी औरैया), देशराज (26 वर्ष, शाहजहांपुर), प्रवीन कुमार श्रीवास्तव (22 वर्ष, हाथरस), रामसुमिरन (26 वर्ष, हरदोई) और सत्यम (लगभग 27 वर्ष, औरैया) के रूप में हुई है। सभी आरोपी अलग-अलग जनपदों से संबंध रखते हैं और संगठित रूप से साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहे थे।पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे भीड़भाड़ वाले स्थानों से मोबाइल फोन चोरी करते थे और फिर उन मोबाइलों में मौजूद बैंकिंग एप्लीकेशन और सिम कार्ड का उपयोग कर नई यूपीआई आईडी बनाते थे। इसके बाद वे खाताधारकों की जानकारी के बिना उनके बैंक खातों से धनराशि ट्रांसफर और निकासी कर लेते थे।पुलिस के अनुसार यह गिरोह संगठित तरीके से डिजिटल बैंकिंग सिस्टम का दुरुपयोग कर लंबे समय से साइबर अपराध को अंजाम दे रहा था। इस पूरे नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों और इनके पुराने मामलों की भी जांच की जा रही है।पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी पड़ताल की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह ने अब तक कितनी घटनाओं को अंजाम दिया है।डीसीपी उत्तरी की ओर से नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने मोबाइल फोन और डिजिटल बैंकिंग ऐप्स को सुरक्षित रखें, किसी भी अनजान लिंक या संदिग्ध गतिविधि पर सतर्क रहें और मोबाइल चोरी या गुम होने की स्थिति में तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।