छत्तीसगढ़ की बिटिया डॉ. शिखा गोस्वामी को मिला Global Icons of India 2026 Award
छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले की सुप्रसिद्ध साहित्यकार, कवयित्री एवं उपन्यासकार डॉ. शिखा गोस्वामी “निहारिका” को साहित्य के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए नासिक (महाराष्ट्र) से Global Icons of India Award से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें हिंदी साहित्य के प्रति उनके समर्पण, रचनात्मकता और समाज को प्रेरित करने वाली रचनाओं के लिए प्रदान किया गया।
डॉ. शिखा गोस्वामी “निहारिका” पिछले कई वर्षों से साहित्य साधना में निरंतर सक्रिय हैं। उनकी लेखनी में समाज की संवेदनाएँ, महिलाओं की पीड़ा, संघर्ष, प्रेरणा और जीवन के गहरे अनुभवों की झलक देखने को मिलती है। उनकी रचनाएँ पाठकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने के साथ-साथ सकारात्मक संदेश भी देती हैं।
बताते चले कि निहारिका मुस्किल हालातो से लड़ते हुए भी आज अपनी पहचान स्थापित करने में सफल हुई है। इनके प्रशंसकों की संख्या विदेशों मे भी है।
अब तक उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें कुछ भीगे अल्फाजों में, वजह मिल गई, निहारिका की प्रेरक कथाएँ, आकांक्षी तथा Aspirant जैसे महत्वपूर्ण पुस्तके शामिल हैं। उनकी रचनाएँ देश-विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और साहित्यिक मंचों पर प्रकाशित होकर सराही जा चुकी हैं।
निहारिका “बलात्कार” जैसे मुद्दे पर बेबाकी से अपनी बात रखने के लिए जानी जाती है। उनकी दिल्ली रेप कांड पर आधारित निर्भया सांझ नामक चर्चित पुस्तक है, जिसमे दुष्कर्मियों से बचने के बहुत से कारगर तरीके बताए गए हैं।
इस सम्मान के माध्यम से डॉ. निहारिका के साहित्यिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। इस उपलब्धि पर साहित्य प्रेमियों, पाठकों और क्षेत्रवासियों ने उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए इसे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण बताया है।
डॉ. निहारिका ने इस सम्मान के लिए प्रशंसकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें साहित्य सृजन के क्षेत्र में और अधिक मेहनत और समर्पण के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा।
12 अप्रैल’2026 पड़रौना कुशीनगर में ‘जनार्दन पांडेय अनुरागी’ साहित्य सम्मान से सम्मानित ‘यमराज मित्र’ के नाम से चर्चित गोण्डा के वरिष्ठ कवि/ साहित्यकार सुधीर श्रीवास्तव ने शिखा की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बधाइयां, शुभकामनाएं, आशीर्वाद देने के साथ उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि शिखा की जिजीविषा अनुकरणीय है। अपनी शारीरिक विसंगतियों को आइना दिखाते हुए आगे बढ़ते हुए शिखा का निरंतर निखरता व्यक्तित्व निराशा की दलदल में जनमानस को आशा का संचार करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा और होना भी चाहिए।