तीन माह में आकांक्षी ब्लॉकों को कुपोषण मुक्त करने का लक्ष्य, डीएम अनुपम शुक्ला ने की समयसीमा निर्धारित
*“कुपोषण मुक्त अम्बेडकर नगर” अभियान के तहत 7500 से अधिक बच्चों के सुधार हेतु ठोस रणनीति तय*
*अधिकारियों ने गोद लिए कुपोषित बच्चे, जनभागीदारी से कुपोषण उन्मूलन का संकल्प*
*1665 सैम व 5866 मैम बच्चों को सुपोषित बनाने की रणनीति तय—जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारी*
*तीन माह में भियांव, भीटी व टांडा होंगे कुपोषण मुक्त: डीएम अनुपम शुक्ला*
अम्बेडकरनगर। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला की अध्यक्षता में महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में “कुपोषण मुक्त अम्बेडकर नगर” विषयक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में जनपद के सभी 09 विकास खण्डों में चिन्हित कुल 1665 सैम (गंभीर कुपोषित) एवं 5866 मैम (मध्यम कुपोषित) बच्चों की स्थिति एवं उन्हें सुपोषित श्रेणी में लाने संबंधित रणनीति के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि आगामी तीन माह में आकांक्षी विकास खण्ड भियांव, भीटी एवं टांडा को कुपोषण मुक्त किया जाए तथा अगले एक वर्ष में सम्पूर्ण जनपद को कुपोषण मुक्त बनाया जाएगा। प्रथम चरण में चयनित विकास खण्डों के 409 बच्चों को कुपोषण श्रेणी से बाहर लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए तीनों आकांक्षी विकास खंडों में लगभग 200 अधिकारियों द्वारा दो-दो बच्चों को गोद लेकर उनके स्वास्थ्य में सुधार हेतु योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा। उन्होंने निर्देशित किया कि संबंधित अधिकारी नियमित रूप से बच्चों के घरों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों का भ्रमण कर आयु, लंबाई एवं वजन के अनुसार उनकी प्रगति की साप्ताहिक मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें। साथ ही, आईसीडीएस योजना के अंतर्गत सैम बच्चों को दिए जा रहे दोगुना पोषाहार एवं अतिरिक्त पोषण पोटली का शत-प्रतिशत वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक बच्चे का समय से टीकाकरण कराया जाए तथा बुधवार को आयोजित वीएचएनडी सत्र में स्वास्थ्य परीक्षण एवं आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाए।
जिलाधिकारी ने कुपोषण उन्मूलन को सामाजिक दायित्व बताते हुए आंगनबाड़ी, आशा, एएनएम, कोटेदार एवं ग्राम प्रधानों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।उन्होंने उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया कि संबंधित आशा कार्यकर्ता इन चिन्हित बच्चों के घरों का नियमित भ्रमण करें। साथ ही, आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण वाटिकाओं को सुदृढ़ बनाने तथा अभिभावकों को पोषण संबंधी जानकारी देकर बच्चों को संतुलित आहार उपलब्ध कराने के लिए जागरूक करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने घोषणा की कि जो ग्राम सर्वप्रथम कुपोषण मुक्त होगा, उसे अतिरिक्त विकासात्मक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार शुक्ला ने कुपोषित बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रभावी रणनीति के साथ कार्य करने पर बल दिया तथा संबंधित परिवारों को पेंशन, जॉब कार्ड एवं अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के निर्देश दिए। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उप जिलाधिकारी अकबरपुर श्रीमती प्रतीक्षा सिंह ने सभी अधिकारियों से संकल्प के साथ निर्धारित लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति सुनिश्चित करने का आह्वान किया। कार्यशाला में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), जिला कार्यक्रम अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, आशा, एएनएम, कोटेदार एवं अन्य संबंधित कर्मचारी उपस्थित रहे।