*आह्वान 2026: ‘विकसित भारत @2047’ के लिए चैरिटी नहीं, ‘साझा जिम्मेदारी’ और तकनीक बनेगी आधार*


*​नई दिल्ली:* विश्व युवक केंद्र द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘आह्वान 3.0’का भव्य समापन दिल्ली में हुआ। इस सम्मेलन ने भविष्य के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है, जिसमें तकनीक, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और एनजीओ के बीच ‘सह-निर्माण’ को विकास का मुख्य आधार माना गया है।
*​तकनीक: समाधान नहीं, समावेशी विकास का सेतु*
​सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत प्रार्थना और सकारात्मक आत्मचिंतन के साथ हुई। पांचवें सत्र “सामाजिक हित के लिए प्रौद्योगिकी की संभावनाओं को साकार करना” में अटल इनक्यूबेशन सेंटर के सीईओ उदय वांकावाला ने कहा कि तकनीक को समाधान के बजाय एक सक्षम साधन के रूप में उपयोग करना चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य प्रशिक्षण और ग्रामीण आजीविका में डिजिटल प्लेटफॉर्म के सफल स्टार्टअप उदाहरण साझा किए।
​ट्रिकल अप एशिया के क्षेत्रीय निदेशक सुशांत ने मोबाइल तकनीक के जरिए महिला उद्यमियों के सशक्तिकरण और ‘लैंगिक डिजिटल अंतर’ को खत्म करने की आवश्यकता पर बल दिया।
ग्लोबल लॉजिक की सीएसआर हेड मोनिका ने कहा कि तकनीक प्रभाव तो बढ़ा सकती है, लेकिन सामाजिक चुनौतियों के लिए समुदाय की भागीदारी और मजबूत निगरानी अनिवार्य है।
थिंक थ्रू कंसल्टिंग के सह-संस्थापक अजय पाण्डेय ने तकनीक को सड़क और रेल जैसी बुनियादी संरचना मानकर एआई (AI) और डेटा विश्लेषण के उपयोग का सुझाव दिया।
*​सी एस आर और एन जी ओ साझेदारी: विश्वास और जवाबदेही की नई इबारत*
​छठे सत्र में विवेक प्रकाश सीनियर वीपी-वाइस प्रेसिडेंट ज्यूबिलेंट इंग्रेविया लिमिटेड ने सीएसआर को कानूनी अनुपालन से ऊपर उठाकर दीर्घकालिक सामाजिक लक्ष्यों से जोड़ने की बात कही।
पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन के सीजीएम एम. प्रभाकर दास ने आकांक्षी जिलों में सरकारी प्राथमिकताओं के साथ सीएसआर के तालमेल को महत्वपूर्ण बताया।
​अपोलो फाउंडेशन की हेड ऑपरेशंस सुधा जिदरिया ने स्वास्थ्य सेवाओं में केवल शिविरों तक सीमित न रहकर निवारक देखभाल और मापने योग्य परिणामों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा।
विपुल कांत उपाध्याय (सीईओ, दांतया एडवाइजर्स) ने डेटा-आधारित योजना और एनजीओ के क्षमता निर्माण को स्थायी परिणामों की कुंजी बताया। वहीं, एक्साइड इंडस्ट्रीज के निशांत सिन्हा और असम गैस कंपनी के स्वतंत्र निदेशक धीरेंद्र हांडिक ने पर्यावरण संरक्षण को कंपनियों की मूल रणनीति का हिस्सा बनाने और पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति जिम्मेदार होने पर जोर दिया।
*​ग्रामीण सशक्तिकरण से राष्ट्रीय प्रगति*
​सातवें सत्र “विकसित गाँव, विकसित भारत @2047” में पी.के. साहू सह-संस्थापक, सी वाई एस डी ने समुदायों को सक्रिय निर्णय लेने वाला बनाने की वकालत की।
ओएनजीसी फाउंडेशन के सीईओ संदीप कुमार ने ग्रामीण आय में विविधता, युवा कौशल, खेल और जलवायु लचीलापन को विकास का स्तंभ बताया। आरएएफ ग्लोबल के सीईओ सुजीत सरकार ने संसाधनों के अनुकूलन और जवाबदेही को सीएसआर में गहराई से शामिल करने की बात कही।
बडी4स्टडी के सीईओ आशुतोष बर्नवाल ने आंकड़ों के जरिए दिखाया कि छात्रवृत्ति और मेंटरशिप किस तरह गरीबी के चक्र को तोड़कर समावेशी विकास का चालक बनती है।
*चैरिटी से साझा विजन की ओर*
​सम्मेलन के समापन सत्र के मुख्य अतिथि पवित्र कुमार दुबे आई आर एस , अतिरिक्त आयकर आयुक्त, दिल्ली ने पारदर्शिता और समावेशिता को विकास की पहली शर्त बताया। विज़न फाउंडेशन ऑफ इंडिया के सीईओ डॉ. नयन चक्रवर्ती ने सशक्त एनजीओ नेतृत्व और जवाबदेही ढांचे की आवश्यकता दोहराई।
​श्री सीमेंट के सीएसआर हेड विशाल भारद्वाज ने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों के लिए कॉर्पोरेट-एनजीओ सहयोग अब अनिवार्य है।
विश्व युवक केंद्र के सीईओ उदय शंकर सिंह ने शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए एक साझा ज्ञान भंडार और डेटा-संचालित हस्तक्षेप का मार्ग प्रशस्त किया। कार्यक्रम के अंत में विश्व युवक केंद्र के कार्यक्रम अधिकारी मंजूनाथ के. ने सभी सरकारी प्रतिनिधियों, कॉर्पोरेट लीडर्स और एनजीओ पार्टनर्स का आभार व्यक्त किया।
​निष्कर्ष स्वरूप, आह्वान ने यह साझा विश्वास पुख्ता किया कि सीएसआर को ‘चैरिटी’ से ‘साझा जिम्मेदारी’ और ‘सामूहिक विजन’ में बदलना ही एक विकसित और टिकाऊ भारत के निर्माण का केंद्र होगा।