श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन गंगा तट प्रसंग, विदुर चरित्र और सती कथा का मार्मिक वर्णन

श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन गंगा तट प्रसंग, विदुर चरित्र और सती कथा का मार्मिक वर्णन

 

मेहनौना। ग्राम मेहनौना में आयोजित सात दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या कथा पंडाल में पहुंची। मुख्य यजमान हनुमान प्रसाद दुबे एवं सुमित्रा देवी की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा।

 

कथावाचक महेश दास जी महाराज ने तीसरे दिन सुखदेव जी के दिव्य प्रवचन का वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार राजा परीक्षित गंगा तट पर बैठकर पूर्ण श्रद्धा से भागवत कथा का श्रवण कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गंगा तट का यह प्रसंग त्याग, वैराग्य और भक्ति का अद्भुत उदाहरण है, जहां मृत्यु का भय भी भक्ति के आगे छोटा पड़ जाता है।

महाराज ने विदुर चरित्र का विस्तार से वर्णन करते हुए धर्म, नीति और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि विदुर ने सदैव धर्म का साथ दिया और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाई। इसके साथ ही सृष्टि के वर्णन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने सृजन की दिव्य प्रक्रिया को सरल शब्दों में समझाया।

 

सती चरित्र का मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने माता सती के त्याग, स्वाभिमान और पतिव्रत धर्म की व्याख्या की। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। भजन-कीर्तन से पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। आयोजन समिति के अनुसार कथा प्रतिदिन निर्धारित समय पर जारी रहेगी।

 

संगीत टीम में सियाराम दास जी, राधेश्वर सरण, सीताराम सरण, संतोष सरण, श्रीकांत सरण, विनोद दास, लक्ष्मण दास, राकेश दास व राणा दास ने मधुर भजनों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता रही। आयोजन समिति के अनुसार कथा प्रतिदिन निर्धारित समय पर आयोजित की जा रही है।