जीवन है अनमोल खजाना – सुधीर श्रीवास्तव 

चौपाई – जीवन

********

जीवन है अनमोल खजाना।

जिसने इसे नहीं पहचाना।।

जिसने मर्म नहीं पाया है।

उस पर अंधकार छाया है।।

 

इसको पढ़ना बड़ा सरल है।

समझ सको तो सुधा गरल है।।

जीवन में सुख दुख का मेला।

समझो नाटक है या खेला।।

 

जीवन की है अजब कहानी।

प्रेम सुधा रस गरल निशानी।।

कभी हँसाती, कभी रुलाती।

जमकर खिल्ली कभी उड़ाती।।

 

जीवन का आशय तुम जानो।

तभी भाव इसका तुम मानो।।

नहीं उपेक्षा इसकी करिए।

प्रेम भाव रस पावन भरिए।।

 

जीवन का आयाम बड़ा है।

कहाँ आपसे दूर खड़ा है।।

बस इसका सम्मान कीजिए।

सुधा-सिक्त आनंद पीजिए।।

 

जीवन में अनमोल मिला है।

फिर भी शिकवा और गिला है।।

यही भूल पड़ती है भारी।

धोखा देती हर तैयारी।।

 

कल की चिंता आज न करिए।

वर्तमान में हँसकर रहिए।।

जीवन सूत्र पकड़ कर रहिए।

निज सौभाग्य मानकर चलिए।।

 

जीवन कठिन परीक्षा लेता।

यह परिणाम समय पर देता।।

इसका आना उसका जाना।

जीवन तो बस एक बहाना।।

 

नहीं एक रस जीवन होता।

कोई हँसता कोई रोता।।

धैर्य सदा सुख का पथ दाता।

चंचलता दुख राह दिखाता।।

 

जीवन अपना आप सुधारो।

खोया पाया सदा विचारो।

जीवन दोष कभी मत देना।

यह सतरंगी साबुन फेना।।

 

जल जीवन का गहरा नाता।

इक दूजे का भाग्य विधाता।।

जल बिन नहीं रहेगा जीवन।

जल ही है असली संजीवन।।

 

सुधीर श्रीवास्तव

गोण्डा उत्तर प्रदेश