कप्तानगंज में हिंदू सम्मेलन सनातन धर्म के प्रति लोगों को किया गया जागरूक
बस्ती: आज से नहीं आदिकाल से विश्व के सिरमौर के रूप में भारत की जो पहचान रही है वह अपने धर्म यानी संस्कृति और सभ्यता के कारण ही रही है । हम कभी अपनी बात नहीं करते बल्कि वसुधैव कुटुंबकम की भावना के साथ पूरे विश्व को अपना परिवार मानते हैं । हमारी यह वैदिक संस्कृति ही विश्व की इकलौती संस्कृति है जिसमें सबको समेटने का असीम फैलाव है । हमने कभी स्व को नहीं बल्कि समष्टि को महत्व दिया है । हां जब सुधार की बात होती है तो जरूर हम यह कहते हैं कि पहले हम अपना सुधार करें तब आगे को देखें । भारतीय संस्कृति एक महासागर के रूप में है जिसमें हम सभी लोग एक बूंद के रूप में ही जाने जाते हैं ।
यह बातें कप्तानगंज में आयोजित हिंदू सम्मेलन को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सेवक संघ के गोरक्ष प्रांत के सहप्रचारक सुरजीत कुमार ने कहीं । उन्होंने कहा की जन्म देने वाली माता के बाद हमारे भारत माता है जो इतने बड़े जन समुदाय का पालन पोषण करती है । हम उसकी सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर के लिए हमेशा तैयार रहते हैं । जब राष्ट्र की बात आती है तो हम स्वयं परिवार और समाज तीनों से ऊपर उठकर राष्ट्र के हितार्थ कार्य करते हैं । यही भावना हमारे अंदर हमेशा होनी भी चाहिए ।
कटरा कुटी के महंत चिन्मयानंद ने कहा कि मनुष्य में देवत्व का दर्शन कराना ही हिंदू और सनातन धर्म का मूल रहा है । जिसे हमें अपने आप में जगाते हुए निर्बाध रूप से आगे बढ़ाना है । हमें इस पृथ्वी पर भेज करके प्रभु ने क्या दायित्व दिया है । इसे याद रखते हुए राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देते रहना है । उन्होंने कहा कि हमें अपने हर कार्य में आनंद प्राप्त करते हुए उसे परमानंद तक ले जाना है तभी हम अपने जीवन के उद्देश्य को सार्थक कर पाएंगे । उन्होंने परमानंद को बड़े व्यापक रूप से लोगों को समझाया । कहा कि अपने कर्तव्यों के निर्वहन की पूर्णता में जो आनंद हमें प्राप्त होता है वही परमानंद है और इसे प्राप्त करने के लिए हमें निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए । क्योंकि यही ईश्वर का स्वरूप है ।
महिला पीजी कॉलेज के संस्कृत विभाग की डॉक्टर कमलेश ने कहा कि भारत भूमि ऋषियों की घूम रही है । जिसमें लोगों ने हमें धर्म के बारे में व्यापक रूप से बताया है । हिंदू धर्म और सनातन धर्म हमें कर्तव्य बोध के दिशा में निरंतर प्रेरित करता रहता है । पथ हमारे भले अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन धर्म सबका एक ही है ।आज हमें आवश्यकता है इस बात की है कि हम अपनी संस्कृति सभ्यता के विस्तार के साथ-साथ हर क्षेत्र में स्वावलंबी बने । हमें स्वदेशी अपनाने पर पूरा जोर देना है । वह चाहे वास्तु हो या विचार तभी हम अपने भारतवर्ष को एक बार फ़िर विश्व गुरु के आसन पर आसीन कर सकेंगे । कार्यक्रम के अध्यक्षता कर रहे गायत्री परिवार के मुख्य प्रबंधक ट्रस्टी जगराम ने कहा कि हमारा सनातन धर्म एक पूरी जीवन पद्धति है । जो हमें जीवन जीने की कला सिखाती है यह विश्व की किसी अन्य संस्कृत में देखने को नहीं मिलती । हम दूसरे पर ना थोप करके पहले अपने सुधार की बात करते हैं । तब समाज अपने आप उसका अनुपालन करने लगता है । जब तक पृथ्वी रहेगी तब तक हिंदू धर्म फलता फूलता और विश्व पटल पर अपना अलग पहचान बनाए रखेगा । संचालन प्रमोद कुमार पांडेय ने किया जहां पर संतोष कुमार ,अजय अग्निहोत्री ,भाजपा के जिला अध्यक्ष विवेकानंद मिश्र, पूर्व जिला अध्यक्ष सुशील सिंह, इंजीनियर वीरेंद्र कुमार मिश्र, राम सिंगार ओझा, ओम प्रकाश ओझा ,रामवृक्ष निषाद ,रणधीर सिंह, संतोष गुप्ता, राम बुझारत चौधरी ,अशोक चौधरी, देव यादव , रामप्रसाद यादव ,मनोज सिंह ,गौरव मणि त्रिपाठी ,राजेश त्रिपाठी , मोहन मोदनवाल , साहब दीन निषाद ,अनिल तिवारी, कपिल देव चौधरी आदि उपस्थित रहे ।