दुर्ग की प्रतिष्ठित एवं ‘वाल्मीकि रत्न’ से सम्मानित

दुर्ग की प्रतिष्ठित एवं ‘वाल्मीकि रत्न’ से सम्मानित साहित्यकार नेहा वार्ष्णेय जी ने अपनी तीसरी पुस्तक “Healing: A Journey From Pain to Power” पाठकों के समक्ष प्रस्तुत की है। यह कृति मात्र साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि लेखिका के जीवन–अनुभवों, संघर्षों और आत्मिक शक्ति की एक प्रेरणादायक सेमी–ऑटोबायोग्राफिकल यात्रा है।

 

इससे पूर्व उनकी दो चर्चित कृतियाँ—

“बदल रही हूँ” (कविता संग्रह) तथा

“Decoding the Gita Within You” (श्रीमद्भगवद्गीता पर आधारित आध्यात्मिक ग्रंथ)

पाठकों में आत्म–जागरण और मानसिक सशक्तिकरण के लिए सराही गई हैं।

 

नई पुस्तक में नेहा जी ने अपने जीवन की पीड़ा, अचानक आई विपत्तियों और उनसे उबरकर पुनः खड़े होने की सशक्त कहानी को ईमानदारी से प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए विशेष है जो जीवन में टूटन, अकेलेपन या मानसिक संघर्ष से जूझ रहे हैं और दर्द को शक्ति में बदलना चाहते हैं।

 

लेखिका के अनुसार—

“हर इंसान के भीतर एक अदृश्य शक्ति होती है। यह पुस्तक उसी शक्ति को जगाने का प्रयास है।”

 

भावनात्मक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर “Healing” एक सम्पूर्ण हीलिंग अनुभव प्रदान करती है। हर अध्याय जीवन को नई दृष्टि और नई ऊर्जा देता है।

 

पुस्तक प्राप्त करने हेतु संपर्क:

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