राजा जैसे गुणों की खान हैं, आदरणीय नरेंद्र मोदी जी
वर्ष 2014 में जब मोदी जी प्रधानमंत्री बने, तब से लेकर आज 2025 तक देश में सकारात्मक परिवर्तन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का जो कार्य प्रारंभ हुआ उसे अब 11 वर्ष हो चुके हैं l
रामलाल का अपने घर विराजमान होना हो या काशी विश्वनाथ मंदिर एवं महाकाल लोक कॉरिडोर का निर्माण, सोमनाथ मंदिर परिसर का जीणोद्धार हो या करतार पुर साहिब कॉरिडोर तैयार होना, चार धाम परियोजना का विकास हो या बुद्ध एवं जैन सर्किट के निर्माण का होना …
मोदी सरकार ने न केवल देश की सांस्कृतिक विरासत को एक सूत्र में पिरोया बल्कि उसे अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ गर्व से खड़ा होना भी सिखाया। बरसों बाद श्रद्धा और विश्वास के साथ जम्मू कश्मीर में खीर भवानी मेले का आयोजन हुआ, दशम गुरु गोविंद सिंह के सुपुत्रों ने के बलिदान को “वीर बाल दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा भी बहुप्रतीक्षित और ऐतिहासिक रही l
हमारी विदेश नीति में भी देश के सांस्कृतिक महत्व को स्थापित किया गया l प्रधानमंत्री मोदी जी विदेशी अतिथियों को श्रीमद् भागवत गीताजी, तुलसी जी का पौधा या भारतीय संस्कृति से जुड़ी चीज ही भेंट करते हैं। वर्षों से चोरी और लूट के जरिए विदेशी पहुंची कलाकृतियां और मूर्तियों के लौटने की खबरें भी अब आने लगी हैं, 2014 के बाद से अब तक विदेश से लगभग 642 प्राचीन मूर्तियां और धरोहर वापस आए हैं l
आयुर्वेद को भी बीते 11 वर्षों में वैश्विक स्वीकृति मिली है,कोरोना काल में वर्तमान पीढ़ी ने आयुर्वेद के महत्व को अच्छे से समझाया है, इस बार 21 जून को हम दसवां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रहे हैं यह विशेष गर्व की अनुभूति वाला पल है, क्योंकि योग दिवस को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्रधानमंत्री की पहल से ही हुई है l
देश में गोवंश की महत्वता फिर से स्थापित हुई है?
भारत अनेकता में एकता का देश है और पूरा देश एक सूत्र में कैसे पिरोया हुआ है इसका दर्शन हमें महाकुंभ में मिला l
प्रयागराज में दिव्य ऊर्जा का जो आभास हुआ उसे यह विश्वास हो गया कि इस देश की आध्यात्मिक चेतना को कोई हिला नहीं सकता l
ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से हमारी पराक्रमी सेना ने आतंकवाद को कैसा जवाब दिया इसे पूरी दुनिया ने देखा l
बीते 11 वर्षों में हमने प्रधानमंत्री संग्रहालय, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, जनजाति स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय, भारत मंडल और नया संसद भवन बनते देखा l
इन 11 वर्षों में हमने देखा कि किस तरह जलियांवाला बाग का पुनरुद्धार हुआ, डिफेंस कॉरिडोर बना और चिनाब पर सबसे ऊंचा रेल पुल भी बना l हमसभीदेशवासी ‘मेक इन इंडिया’ के साथ ‘मेड इन इंडिया’ के साक्षी भी बने l
‘नमामि गंगे’ की धार वही और नारी शक्ति का वंदन “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” के कारण भी हम स्वच्छ भारत की संस्कृति के पालन कर्ता भी बने l
ऐसा प्रतीत होता है कि संस्कृतिक पुनर्जागरण का यह अमृतकाल है l विविधताओं के उत्सव से राष्ट्रीयताओं का जो अमृत निकल रहा है, वह भारत को अनंतकाल तक ऊर्जावान रखने में सक्षम है
जय हिंद
जय भारत….
नेहा वार्ष्णेय
दुर्ग (छत्तीसगढ़)