महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष और देश की संत परंपरा के अग्रणी पुरुष, पूज्य महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज के 87वें जन्मोत्सव के अवसर पर अयोध्या धाम की पावन भूमि पर नौ दिवसीय आध्यात्मिक महोत्सव का भव्य आरंभ रविवार को हुआ। रामनगरी एक बार फिर श्रद्धा, भक्ति और सनातन परंपरा के महासंगम का केंद्र बन गई है। महोत्सव का विधिवत शुभारंभ प्रातः 9 बजे मणिराम दास छावनी परिसर में श्रीराम महायज्ञ के साथ हुआ, जिसमें कमलाकर सिंह राजपूत ने मुख्य यजमान की भूमिका निभाई। वैदिक आचार्यों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच अग्नि प्रज्वलित की गई और वातावरण राम नाम संकीर्तन से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने आयोजन को भक्तिमय रंग में रंग दिया। इस मौके पर कमलाकर ने कहा की यह हमारा परम् सौभाग्य है जो महाराज के जन्म उत्सव के आयोजन मे सेवा करने का मौका मिला l दोपहर 3 बजे से श्रीमद वाल्मीकि रामायण कथा का शुभारंभ हुआ, जो मणिराम दास छावनी स्थित राम कथा मंडपम में आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद व पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने पूज्य महंत जी को “सनातन संस्कृति के जीवंत स्तंभ” की उपाधि देते हुए उनके राम मंदिर आंदोलन में योगदान और आध्यात्मिक नेतृत्व की सराहना की।
इस शुभ अवसर पर बृजभूषण शरण सिंह, अयोध्या के महापौर गिरीशपति त्रिपाठी, जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्रीरामकृष्णाचार्य जी महाराज सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।
आयोजन के प्रमुख संयोजक एवं मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने बताया कि यह जन्मोत्सव न केवल पूज्य महंत जी के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि यह संत परंपरा के संरक्षण, धर्मशिक्षा के प्रचार और सनातन मूल्यों के जागरण का एक महापर्व भी है।
इस महोत्सव में द्वारका पीठ के शंकराचार्य, वृंदावन की सुदामा कुटी के पीठाधीश्वर सुतीक्षण दास जी समेत देशभर से अनेक प्रमुख संत-महंत पधार रहे हैं। राम कथा, यज्ञ, सत्संग और भंडारे के माध्यम से अयोध्या की आध्यात्मिक गरिमा और गौरव को विस्तार मिल रहा है। आयोजन स्थल को विशेष रूप से सजाया गया है और श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं।
महंत नृत्य गोपाल दास जी का जीवन त्याग, भक्ति और राष्ट्रधर्म की त्रिवेणी का अनुपम उदाहरण है। उनका यह जन्मोत्सव एक निजी उत्सव से बढ़कर पूरे देश की धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक जागरूकता का पर्व बन गया है। रामनगरी अयोध्या इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित है, जहां श्रद्धा, साधना और संस्कृति एक सूत्र में बंधकर देश और धर्म की सेवा में समर्पित हैं।