कुदरहा, बस्ती। स्थानीय विकास क्षेत्र के छरदही गांव में चल रही नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य पंडित घनश्याम किशोर मिश्र ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव लीला का वर्णन किया। जिसमें श्रद्धालु बधाइयां गीत पर जमकर थिरके। कथा को विस्तार देते हुए कहा कि कंस के कारागार में वसुदेव देवकी के भादों मास की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। उनका लालन पालन नंद बाबा के घर में हुआ। इसलिए नंद गांव में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान श्री कृष्णा अत्याचारी कंस का वध करके अत्याचार से मुक्त किया और अपने माता-पिता को कारागार से छुडाया। उहोंने धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की महत्ता पर विस्तार से बताते हुए कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अत्याचार, दुराचार बढ़ता है, तब-तब प्रभु का अवतार होता है। प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। जब कंस ने सभी मर्यादाएं तोड़ दी तो प्रभु श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। इसी तरह त्रेतायुग में रावण का अत्याचार बढ़ने पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने जन्म लिया। श्रीकृष्ण के बधईयां गीत पर भक्त खूब थिरके।
मुख्य यजमान राजेंद्र प्रसाद दुबे, आचार्य आनंद मिश्रा, पं विंध्याचल दुबे, नरेंद्र प्रसाद दुबे, राजू दुबे, गुड्डू, धर्मेद्र दुबे, रविद्र, शिखर, विनय, अतुल दुबे, राम प्रकट उपाध्याय, इंद्रजीत दुबे, पंडित हरिराम, बीरेंद्र, संतोष दुबे, बाबूराम, राम भरत दुबे, मनोज, दिलीप कुमार सहित तमाम लोग मौजूद रहे।