कुदरहा, बस्ती। बहादुरपुर विकास क्षेत्र के हठ्ठी माता मंदिर अगौना मे शतचंडी महायज्ञ के अवसर पर चल रही नौ दिवसीय संंगीतमयीश्री राम कथा के तीसरे दिन अवधधाम से आयीं कथा वाचिका प्रतिभा मिश्रा जी ने शिव विवाह के प्रसंग को बिस्तार देते हुए कहा कि पार्वती जी श्रद्धा की प्रतीक हैं तो शिवजी बिश्वास के प्रतीक हैं। अर्थात श्रद्धा और बिश्वास मनुष्य को राम कथा के माध्यम से ही संभव है।जीवन मे श्रद्धा बनती बिगड़ती है। लेकिन बिश्वास अजन्म होता है।संसार मे लोगों के साथ ब्यवहार समय के अनुकूल करना चाहिए।लेकिन मन का ब्यवहार भगवान से हमेशा के लिए करना चाहिए।और संत व भगवान के प्रति मन मे संसय नही करना चाहिए।क्यो कि भगवान के कथा पर संसय होने के कारण सती शरीर का त्याग करना पड़ा।वही सती पार्वती के रुप मे राजाहिमाचंल के यहां पुत्री के रुप मे अवतरित हुई ।और ऋषिराज नारद की प्रेरणा से पार्वतीजी ने तपस्या कर ऋषियों की परीक्षा उत्तीर्ण हुई।तो बिवाह के उपरान्त शिव और पार्वती का मिलन हुआ।
कथा में मुख्य रूप से यज्ञाचार्य सुरेन्द्र शास्त्री,घंटी बाबा, प्रिंस यादव,मग्घू प्रजापति,यशपाल यादव,पलकधारी, विजय कुमार यादव, सुनील अग्रहरि, शंकर प्रजापति,पप्पू यादव,अमित,डबलू, अंबिका यादव, अरविंद दूबे, राजेद्र सिंह,संदीप तिवारी,राकेश,विकास, सचिन दूबे,अंश,रामू,सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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