महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या । श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के तत्वाधान में आयोजित रामकथा के चतुर्थ दिवस पर कथा व्यास राधेश्याम शास्त्री महाराज ने भगवान शिव और पार्वती के विवाह के प्रसंग पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि राजा को प्रजा की सेवा करनी चाहिए और सिर्फ सिंहासन पर बैठे रहने से महान नहीं बना जा सकता।
सनातन धर्म और संस्कृति पर जोर महाराज ने रामभक्तों से सनातन धर्म की सेवा करने और अपनी संस्कृति का पालन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विदेशी लोग अब हमारी संस्कृति पर शोध कर रहे हैं, जबकि हम अपनी ही संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने विवाह को एक धार्मिक क्रिया बताते हुए कहा कि यह अब एक सामाजिक क्रिया बन गई है।ईश्वर, गुरु और राष्ट्र की निंदा का विरोध । महाराज ने ईश्वर, गुरु और राष्ट्र की निंदा करने वालों को महापापी बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य परमात्मा का अंश है और उसके साथ पशुवत व्यवहार नहीं करना चाहिए। रामकथा और भगवद गीता का महत्व उन्होंने रामकथा और भगवद गीता को हमारे विचारों और संस्कारों को अक्षुण्य रखने के लिए महत्वपूर्ण बताया। चुनाव और राजनीति पर टिप्पणी: महाराज ने चुनावों के दौरान हो रहे प्रलोभनों पर चिंता व्यक्त की और लोगों से सात्विकता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से धर्म और कर्म के प्रति जागरूक होने का आग्रह किया।महाराज ने दुर्व्यसनों के खिलाफ आवाज उठाई और कहा कि शरीर को भक्ति और सेवा के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने भक्ति को जाति-पाति से परे बताया और कहा कि भक्ति समर्पण और श्रद्धा पर आधारित होती है। उन्होंने रामराज्य को सत्य और त्याग का आदर्श बताया और कहा कि हमें अपने अंदर सत्य और त्याग को धारण करना चाहिए। कथा के दौरान उपस्थित रहे कथा के दौरान उमेश पोरवाल, प्रेमप्रकाश मिश्र, मयंक पांडेय, शिवनाथ त्रिपाठी एडवोकेट, डा वीरेंद्र पांडेय, राम आधार सिंह, ओमप्रकाश तिवारी आदि सहित सैकड़ों रामभक्त उपस्थित रहे।