*ब्रह्मचर्य बिना ब्रह्म दर्शन असंभव!* आचार्य सुरेश जोशी

🌹🌹 *ओ३म्*🌹🌹
*🌻ब्रह्मचर्य बिना ब्रह्म दर्शन असंभव!*🌻
अहमदाबाद प्रांत गुजरात में *मासिक वेद-महोत्सव* कार्यक्रम के १५ वें दिवस पर *ब्रह्मचर्य शक्ति* विषय पर उपदेश करते हुए बताया गया कि ईश्वर साक्षात्कार व योगी बनने का मूल स्तंभ *ब्रह्मचर्य है!*
हम जो भी भोजन करते हैं उससे शरीर में क्रमश: 🦚 रस,रक्त,मांस,मेद,मज्जा,अस्थि व वीर्य 🦚 के परिवर्तित रुप में सप्त धातुओं का निर्माण होता है।अंतिम धातु *वीर्य* की रक्षा करना ही ब्रह्मचर्य है।इसके लिए इद्रियों व मन पर नियंत्रण करना अनिवार्य है। ब्रह्मचर्य के पालन से *धर्म,विज्ञान,ईश्वर,सत्य को जानने में रुचि होती है। ब्रह्मचर्य से ध्यान में मन लगेगा।मन भोग विलासों से बचा रहेगा।*मन पर नियंत्रण न हो तो किसी भी इंद्रिय पर नियंत्रण* न हो सकेगा।
अब विचार करना है कि ब्रह्मचर्य के पालन से मन पर नियंत्रण करने की विधि क्या है?
इसका उत्तर है *सम्यक दिनचर्या* रात्रि को जल्दी सोना और प्रात:जल्दी उठना।यानि रात्रि को अधिक से अधिक १० बजे तक सोना और प्रात: पांच(५)बजे तक उठना अनिवार्य है।यदि आप *रात्रि में ११बजे के बाद सोते हैं* तो *शरीर+पेट+बुद्धि* तीनों की एक साथ हानि होगी । एक बात तो सभी अंग्रेज भक्त हिंदू कहते हैं।
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*Early to bed.Early to rise.*
*Make a man healthy,welthy and wise.*
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मगर हम देख रहे हैकि प्रैक्टिल में हिंदु फेल है।सत्यता इस प्रकार है।
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*Late to bed,late to rise.*
*Maka a man unhelthy,unwelthy and unwise.*
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परिणाम आपके सामने है। आज लोग शरीर व बुद्धि दोनों से रोगी हैं।अत: जिन्हें ब्रह्मचर्य की रक्षा करके ईश्वर दर्शन करना है उन्हें प्रात:शीघ्र उठना जरुरी है।
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*सुबह-सुबह की हवा।*
*सब रोगों की दवा।।*
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इसी ब्रह्मचर्य को आधुनिक विज्ञान की भाषा में *ऊर्जा संरक्षण विज्ञान* कहा जाता है। जीवन जब ऊर्ध्वगामी होता है तभी ब्रह्चर्य का प्रभाव होता है।जब ऊर्जा शिखर पर जायेगी तभी सुख व आनंद मिलेगा।
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ऊर्जा की प्राप्ति *भोजन* से होती है।नींद से ऊर्जा *संग्रहीत* होती है। जागरण से ऊर्जा *खर्च* होती है।प्राणायाम व व्यायाम से ऊर्जा *जागती* है।धारणा से ऊर्जा *केन्द्रित* होती है। ध्यान से ऊर्जा ऊपर चढ़ती है।वासना से ऊर्जा *गिरती* है।प्रेम से ऊर्जा *फैलती* है व समाधि से ऊर्जा *विराट* के साथ मिलती है। अत: *ऊर्जा/ब्रह्मचर्य* मानव के लिए परमात्मा द्वारा दिया अनमोल रत्न है उसकी *जी-जान* से रक्षा करने से ही प्रभु से मिलन इसी *मन-मंदिर* में हो जायेंगे!
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*देवगण का शस्त्रचर्य है ब्रह्मचर्य!*
*मृत्युतम रबि का उदय है ब्रह्मचर्य!*
*मल विनाशक तप सजग है ब्रह्मचर्य!*
*ब्रह्मचर्य में एक पग है ब्रह्मचर्य!!*
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इस प्रकार *आर्य समाज सैजपुर।आर्य समाज कुबेरनगर।आर्य समाज थलतेज।आर्य समाज कांकरिया* के साथ ग्राम-भाट,गांधीनगर,वेदांता, नंदीग्राम,बंग्ला एरिया,सहित अनेक आर्य परिवारों में *पंडिता रुक्मिणी शास्त्री के वैदिक भजनों व वेद -प्रवचनों* की धूम मची है।
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आचार्य सुरेश वैदिक प्रवक्ता एवं पं०रुक्मिणी शास्त्री।
*प्रवासीय कार्यालय*
आर्य समाज मंदिर सैजपुर बोघा अहमदाबाद गुजरात।।