हमारे पुरखों की है जान,
मुसलमान हिन्दू की है शान,
जहाँ पर होती रोज अजान,
यही है सबका हिंदुस्तान।
मंदिर मस्जिद और गुरुद्वारे,
सभी है एक दूजे के सहारे,
सब सुख दुःख में है हाथ पसारे,
जहां पर पढ़ते गीता और कुरान,
यही है सबका हिंदुस्तान।
हमने जिस मिट्टी में जनम लिया,
वही पर मर मिटने का प्रण किया,
हर मुश्किल में सबने है साथ दिया,
इस देश पर लाखों हुए कुर्बान,
यही है सबका हिंदुस्तान।
जो पढ़ाता भाई चारे का पाठ,
यहां मन में रखता नहीं कोई गाँठ,
जहां की नदी हो अस्सी घाट,
सभी धर्मों का होता यहां सम्मान
यही है सबका हिंदुस्तान।
कृष्ण कान्त मिश्र
आजमगढ़ उ०प्र०
स्वरचित मौलिक