रदीफ – “हूं मैं”
घर परिवार छोड़ परदेश चला जाता हूं मैं,
बोझ घर परिवार का उठाता रहता हूं मैं।
दुख दर्द अपना न कभी कह पाता हूं मैं,
अपने अश्कों को छुपाता रह जाता हूं मैं।
सोचा था परिवार में सब मिलकर रहेंगे,
न चाह कर सबसे दूर चला जाता हूं मैं।
रूठ जाये कोई अपना जब कभी तब,
कर जतन सबको फिर से मनाता हूं मैं।
जब कभी परिवार मुश्किल में हो उर्वर,
उस समय हर मुश्किल से लड़ जाता हूं मैं।
डॉ आशीष मिश्र उर्वर
कादीपुर, सुल्तानपुर
उत्तर प्रदेश