नए कानून के तहत अब किसी भी थाने में दर्ज करा सकते हैं एफआईआर

आज से बदल जाएंगे अंग्रेजों के जमाने के कानून
हत्या का केस अब 302 नहीं 103 में होगा दर्ज
घर बैठे व्हाट्सएप और ईमेल से भी दर्ज करा सकेंगे एफआईआर
रायबरेली जुलाई।अंग्रेजों के जमाने में बनाए गए आइपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य कानून एक जुलाई यानी आज से बदलने जा रहे हैं। हत्या हो या लूट, चोरी हो या फिर मारपीट सभी घटनाओं में कानून की धाराएं बदलने जा रही हैं। इसको लेकर थाने, चौकी से लेकर बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।वहीं कोतवाल से लेकर दारोगा, मुंशी तक को इस संबंध में प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
एक जुलाई से भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम को लागू कर दिया गया है।
आज से भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) होगी। आईपीसी में 511 धाराएं थी लेकिन भारतीय न्याय संहिता में 358 धाराएं होंगी। धाराओं का क्रम बदला गया है। सीआरपीसी (दंड प्रक्रिया संहिता) अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता कहलाएगी। सीआरपीसी में 484 धाराएं थीं। नए कानून में अब इसमें 531 धाराएं होंगी। भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के नाम से जाना जाएगा। पुराने अधिनियम में

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