प्रयागराज। देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की इलाहाबाद संसदीय सीट पर कांग्रेस को 40 वर्षों से जीत का इंतजार खत्म हुआ। पार्टी को इस बार काफी उम्म्मीदें थीं। 1984 में अमिताभ बच्चन के बाद कांग्रेस को जीत नसीब हुई। अन्यथा, विगत कई चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवार जमान तक भी नहीं बचा पाए हैं।
1984 में अमिताभ बच्चन ने रिकार्ड मतों से जीत हासिल की थी लेकिन इसके बाद 1988 के उपचुनाव तथा 1989 में पार्टी दूसरे स्थान पर रही। इसके बाद 1991 के बाद से तो कांग्रेस उम्मीदवार जमानत तक नहीं बचा पाए। 1991 से 2019 के बीच आठ बार लोकसभा चुनाव हुए लेकिन सिर्फ 1999 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहीं रीता बहुगुणा जोशी जमानत बचा पाईं थीं। इनके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहे नंद गोपाल गुप्ता नंदी को ही एक लाख दो हजार 453 वोट मिले थे लेकिन वह भी जमानत नहीं बचा पाए थे। अन्य चुनावों में तो कांग्रेस प्रत्याशी 50 हजार मतों के लिए भी जूझते नजर आए। खास यह कि डॉ.रीता और नंदी दोनों नेता इस समय भाजपा में हैं।
हालांकि, कांग्रेस के लिए इस बार कहानी कुछ अलग रही। सपा के साथ गठबंधन के तहत यह सीट कांग्रेस के पास आई और पार्टी ने क्षेत्र के दिग्गज नेता रेवती रमण सिंह के पुत्र एवं पूर्व मंत्री रहे उज्जवल रमण सिंह को मैदान में उतारा। वहीं भाजपा ने पूर्व राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी के पुत्र नीरज त्रिपाठी को प्रत्याशी बनाया था। इन दोनों प्रत्याशियों के बीच काफी नजदीकी मुकाबला जा रहा और 40 वर्षों बाद कांग्रेस में जीत हुई है।