संत-सेवा से जीवंत हुई अयोध्या की प्राचीन परंपरा, त्रिवेणी दास महाराज की पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या । धर्मनगरी अयोध्या के जानकी घाट स्थित श्री सीता बल्लभ कुंज एवं सत्संग सेवा समिति के प्रांगण में गुरुवार को आध्यात्मिक उल्लास और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। साकेतवासी श्री श्री 1008 श्री त्रिवेणी दास महाराज की 26वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित विशाल भंडारे में साधु-संतों और गृहस्थों का भारी जमावड़ा रहा। श्रद्धालुओं ने महाराज जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें अपनी भावांजलि दी संकीर्तन से गुंजायमान हुआ मंदिर परिसर
महोत्सव का शुभारंभ ब्रह्ममुहूर्त में विशेष पूजन और साकेतवासी महाराज जी की आरती के साथ हुआ। पूरा मंदिर परिसर ‘श्री सीताराम’ के भक्तिमय संकीर्तन से सराबोर रहा। इस दौरान वर्तमान महंत और कार्यक्रम के निवेदक पं. श्री रामायणी रामश्रेष्ठ दास महाराज ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि साकेतवासी महाराज का जीवन त्याग और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक था। उनके बताए मार्ग पर चलकर ही समाज का कल्याण संभव है।
हजारों भक्तों ने ग्रहण किया भोजन प्रसाद दोपहर 12 बजे से प्रारंभ हुए भव्य भंडारे में अयोध्या के विभिन्न अखाड़ों, आश्रमों और सिद्धपीठों से आए प्रतिष्ठित संतों ने पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। संतों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों और दूर-दराज से आए सैकड़ों गृहस्थ श्रद्धालुओं ने भी कतारबद्ध होकर भोजन प्रसाद पाया। सेवा समिति के सदस्यों और भक्तगणों ने आगंतुकों का स्वागत कर पूरी तत्परता से सेवा की। श्रद्धा और आस्था का संगम कार्यक्रम में मुख्य रूप से अयोध्या के कई प्रमुख मंदिरों के महंत और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। भक्तों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से न केवल नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति की जानकारी मिलती है, बल्कि अयोध्या की ‘संत-सेवा’ की गौरवशाली परंपरा भी और सुदृढ़ होती है। कार्यक्रम के अंत में पं. रामायणी रामश्रेष्ठ दास जी ने सभी का आभार प्रकट किया।