🪷 ओ३म् 🪷
📚 *ईश्वरीय वाणी वेद*📚
ओ३म् अग्निर्होता कविक्रतु: सत्यश्चित्रश्रवस्तम:। देवो देवेभिरागमत्।।
🌼 *मंत्र का पदार्थ*🌼
जो [ सत्य:] अविनाशी [देव:] अपने आप प्रकाशमान [ कविक्रतु: ] सर्वज्ञ है, जिसने परमाणु आदि पदार्थ और उनके उत्तम गुण रचके दिखाये हैं,जो सब विद्यायुक्त वेद का उपदेश करता है, और जिसके कारण सृष्टि के उत्तम पदार्थों का दर्शन होता है वहीं कवि अर्थात् सर्वज्ञ ईश्वर है। ये जो अग्निहोत्र की अग्नि है ये भी स्थूल और सूक्ष्म पदार्थों के कला युक्त लोक -लोकांतरो में गमन कराने वाला बतलाया है। [ चित्रश्रवस्तम: ] जिसे भक्त गण आश्चर्य पूर्वक श्रवण करते हैं, वह परमेश्वर [ देवेभि: ] विद्वानों की संगति करने से ही प्राप्त होता है। यह मंत्र ऋग्वेद मंडल १ सूक्त १का पांचवां मंत्र है।
🔥 *मंत्र का सारतत्व*🔥
जो परमात्मा सर्वज्ञ,सर्वाधार,कवि, अविनाशी, अनन्त शक्तिमान, अग्नि विज्ञान से प्रकृति को ग्लोबल वार्मिंग से बचाता है उसकी साक्षात्कार वैदिक विद्वानों की संगति से ही संभव है।
🦚 *प्रेरणात्मक चिंतन*🦚
यदि आप वेद मंत्रों पर सरल,सरस, मधुर व सारगर्भित प्रवचन एवं वैदिक भजनों को परिवार के साथ बैठकर कर प्रतिदिन सुनना चाहते हैं तो हमारे यू ट्यूब चैनल *आचार्य वेद वाणी* पर जाकर सुन सकते हैं।
आचार्य सुरेश जोशी
*वैदिक प्रवक्ता*
आर्यावर्त साधना सदन पटेल नगर दशहराबाग बाराबंकी उत्तर प्रदेश ☎️ 7985414636☎️