संवाददाता अनुराग उपाध्याय
श्रीमद्भागवत की कथा से वैराग्य, ज्ञान और हरि से मिलने का मार्ग प्रशस्त करती है,और जो व्यक्ति स्वयं को भौतिक सुखों से मुक्त कर लेता है उसका मोक्ष सम्भव हो जाता है। यह उद्गार राजातारा गांव में पूर्व प्राचार्य भगवानदीन त्रिपाठी के संयोजन में आयोजित संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस भागवत मर्मज्ञ आचार्य अरुणेश त्रिपाठी जी महराज ने व्यक्त किया।
उन्होंने भगवान श्री हरि के चौबीस अवतारों का सारगर्भित वर्णन करते हुए कहा कि जब जब धरा पर धर्म की हानि होना सुरु हुआ तब तब भगवान हरि ने अवतार लेकर धर्म की स्थापना की।महराज जी सुखदेव जन्म की व्याख्या कर लोगों को भावविभोर कर दिया और कहा कि राजा परीक्षित के कारण ही कलयुग में भागवत श्रवण करने अवसर मानव जाति को प्राप्त हुआ है।कथा पृथ्वी के लोगों को सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
कथा व्यास ने कहा कि भागवत के चार अक्षर इसका तात्पर्य यह है कि भा से भक्ति, ग से ज्ञान, व से वैराग्य और त त्याग जो हमारे जीवन में प्रदान करे उसे हम भागवत कहते है।कथा व्यास ने द्वितीय दिवस के विविध प्रसंगों का सरस वर्णन कर श्रोताओं में आध्यात्मिकता का संचार किया। आभार रामकृष्ण तिवारी ने व्यक्त किया।इस मौके पर आचार्य कमलेशपति मिश्र, सोनू महराज अरविंद तिवारी, हरिशंकर मिश्र, नर्मदा प्रसाद शुक्ल, छेदीलाल शुक्ल, श्रीधर शुक्ल, मनोज तिवारी , भोलानाथ तिवारी आदि मौजूद रहे।