दोस्तो मन में यही अरमान है-रूपेंद्र नाथ सिंह रूप

 

आन है यह शान है यह जान है।
इस पे ही तो जां मेरी कुर्बान है।

जग में फिर से देश यह शिरमौर हो।
दोस्तो मन में यही अरमान है।

हर किसी के मन में बस सद्भाव हो।
कह रहा कब से ये हिन्दुस्तान है।

नेक होकर एक होकर हम रहें।
ज़िन्दगी का बस यही उनवान है।

इसकी अज़्मत को बचाना है हमें।
काम लेकिन यह नहीं आसान है।

इसकी ख़ातिर जान की परवाह कब।
सब से बढ़कर देश का सम्मान है।

ख़ूब कुदरत ने नवाज़ा है इसे।
रूप यह हर एक रस की खान है।

रूपेंद्र नाथ सिंह रूप

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