राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर उन्मुक्त उड़ान मंच की भव्य आभासी काव्य गोष्ठी सम्पन्न

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर उन्मुक्त उड़ान मंच की भव्य आभासी काव्य गोष्ठी सम्पन्न

 

उन्मुक्त उड़ान मंच – आपका अपना साहित्यिक मंच के तत्वावधान में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर एक भव्य आभासी काव्य गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंच की संस्थापिका, अध्यक्षा, संयोजिका एवं संचालिका डॉ. दवीना अमर ठकराल “देविका” द्वारा माँ शारदे की वंदना एवं स्तुति से हुआ।

अपने स्वागत उद्बोधन में डॉ. देविका ने चिकित्सकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चिकित्सक केवल रोगों का उपचार ही नहीं करते, बल्कि जीवन में आशा, विश्वास और नवचेतना का संचार भी करते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के इतिहास एवं विश्व स्तर पर इसके महत्त्व की भी संक्षिप्त जानकारी साझा की।

 

नेशनल डॉक्टर्स डे 2026 के लिए चुनी गई थीम “बिहाइंड द मास्क: हू हील्स द हीलर्स?” (Behind the Mask: Who Heals the Healers?”) (पर्दे के पीछे: इलाज करने वालों का इलाज कौन करता है?का भी वर्णन किया।यह थीम हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स के लिए बेहतर सपोर्ट सिस्टम, सहानुभूति और उनकी अपनी देखभाल की जरूरत पर जोर देती है।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए विशेष शर्मा “सुहासिनी” ने चिकित्सकों के अतुलनीय योगदान को रेखांकित किया तथा अपनी भावपूर्ण कविता “सफेद कोट के भीतर धड़कता दिल” का प्रभावशाली पाठ किया। उन्होंने कहा कि “चिकित्सक होना केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि टूटते हुए शरीर में विश्वास और उम्मीद का दीप जलाने का संकल्प है। डॉक्टरों की सेवा और समर्पण को समाज को उचित सम्मान देना चाहिए।”

वीना टंडन “पुष्करा” ने चिकित्सकों को मानवता का सच्चा उपासक बताते हुए अपनी रचना में कहा

“श्वेत वसन पहने देवदूत, मानवता के पुजारी हो…”

उनकी प्रस्तुति ने सभी श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

अनु तोमर “अग्रजा” ने अपनी रचना के माध्यम से चिकित्सकीय सेवा के मानवीय पक्ष को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया।

डॉ. फूलचंद्र विश्वकर्मा “भास्कर” ने राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के प्रेरणास्रोत डॉ. विधान चंद्र राय का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने चिकित्सकों को ईश्वर का स्वरूप बताते हुए वर्तमान कॉर्पोरेट चिकित्सा व्यवस्था पर भी सार्थक एवं विचारोत्तेजक कटाक्ष किया।

किरण भाटिया “नलिनी” ने चिकित्सकों की जीवनदायिनी भूमिका का मार्मिक चित्रण करते हुए कहा

“चिकित्सकों में जीवन देने की कला है, साँसों के टूटने से पहले की एक आखिरी उम्मीद।”

नीरजा शर्मा “अवनि” ने चिकित्सकों को मानव जीवन का रक्षक बताते हुए उनके समर्पण और सेवा-भाव का भावपूर्ण वर्णन किया।

संजीव कुमार भटनागर “सजग” ने अपनी प्रभावशाली रचना में कहा

“चिकित्सक साँसों की धड़कन में, विश्वास की छाँव हैं,

मृत्यु-सीमा से वापस लाते, ये ही वो नाव हैं।”

डॉ. अनीता राजपाल “वसुंधरा” ने अपनी भावाभिव्यक्ति में कहा

धन- लोभ ,लोलुपता से बचा रहे हर चिकित्सक

ईश्वर के दूत बन रोगों को निरस्त करें चिकित्सक।

तथा रेखा पुरोहित “तरंगिणी” ने भी अपनी उत्कृष्ट काव्य प्रस्तुतियों से चिकित्सकों के सेवा-धर्म को नमन करते हुए कहा

“धरा पर प्रभु के दूत बन, तन-मन की पीड़ा हरते हैं।

मानवता की करके सेवा, हर रोग को दूर वो करते हैं।”

सुरेशचन्द्र जोशी ‘सहयोगी’ जी ने अपनी भावाभिव्यक्ति निम्न शब्दों से दी

डॉक्टर को सब कहते देखो, धरती पर भगवान।

करे चिकित्सा वह जनता की, रखता उनका ध्यान।।

कार्यक्रम के समापन की ओर डॉ. दवीना अमर ठकराल “देविका” ने अपनी ओजस्वी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा—

“ईश्वर के दूत कहें या ईश्वर का दूसरा रूप,

सच्चे चिकित्सक को कर्तव्यबोध होता अनूप।

हर चीख़ को सुन, हर आँसू को समझ लेते हैं,

अपने जज़्बात छुपा, औरों के ज़ख्म सह लेते हैं।

जो हर मोड़ पर मरते जीवन को थाम लेते हैं,

वो चिकित्सक नहीं, देवत्व की मिसाल कहलाते हैं।”

पूरे आयोजन में उपस्थित साहित्यकारों ने चिकित्सकों की सेवा, समर्पण, त्याग एवं मानवता के प्रति उनकी निष्ठा को भावभीनी श्रद्धांजलि एवं नमन अर्पित किया। काव्य, संवेदना, सम्मान और कृतज्ञता से ओतप्रोत इस गोष्ठी ने सभी श्रोताओं के हृदय को स्पर्श किया।

अंत में मंच की संस्थापिका, अध्यक्षा, संयोजिका एवं संचालिका डॉ. दवीना अमर ठकराल “देविका” ने सभी प्रतिभागियों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए चिकित्सक समुदाय के उत्तम स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि एवं सम्मानपूर्ण जीवन की मंगलकामनाएँ प्रेषित कीं।