लखनऊ उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीटीसीएल) ने पावर कॉरपोरेशन, सहयोगी वितरण कंपनियों, ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन तथा राज्य विद्युत उत्पादन निगम के कार्यरत कर्मचारियों, पेंशनरों एवं उनके पात्र आश्रितों को उपलब्ध कराई जा रही कैशलेस चिकित्सा सुविधा में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति सूचीबद्ध चिकित्सालयों द्वारा प्रस्तुत ₹7.50 लाख से अधिक के चिकित्सा दावों की जांच करेगी तथा गैर सूचीबद्ध उपचारों की अनुमन्यता एवं दरों का निर्धारण भी करेगी।11 जून 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार निगम द्वारा मान्यता प्राप्त सूचीबद्ध अस्पतालों में कर्मचारियों एवं पेंशनरों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाती है। बढ़ते चिकित्सा व्यय और उच्च राशि वाले दावों के परीक्षण की आवश्यकता को देखते हुए यह समिति गठित की गई है, जो उपचार की आवश्यकता, चिकित्सा व्यय की ग्राह्यता, निगमादेशों के अनुपालन तथा अस्पतालों द्वारा प्रस्तुत दावों की युक्तिसंगतता का परीक्षण करेगी।समिति के अध्यक्ष के रूप में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के महाप्रबंधक (चिकित्सा) को नामित किया गया है। इसके अलावा संयुक्त सचिव प्रथम, अधीक्षण अभियंता (एचआर-03), वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी, वरिष्ठ लेखाधिकारी तथा मेडिकल सेल के अधिशासी अभियंता को समिति में सदस्य बनाया गया है। मेडिकल सेल के अधिशासी अभियंता समिति के सदस्य-संयोजक होंगे।समिति को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह ₹7.50 लाख से अधिक के सभी कैशलेस चिकित्सा दावों और बिलों का परीक्षण करे। साथ ही उपचार की आवश्यकता, अपनाई गई चिकित्सा प्रक्रिया की उपयुक्तता तथा व्यय की ग्राह्यता की समीक्षा करेगी। समिति यह भी सुनिश्चित करेगी कि सभी दावे निगमादेशों और लागू नियमों के अनुरूप हों।आवश्यकता पड़ने पर समिति संबंधित चिकित्सालयों अथवा लाभार्थियों से स्पष्टीकरण एवं अतिरिक्त अभिलेख भी प्राप्त कर सकेगी। परीक्षण के बाद देय अथवा ग्राह्य राशि के संबंध में सक्षम प्राधिकारी को अपनी संस्तुति उपलब्ध कराएगी। यदि किसी दावे में अनियमितता, अतिरिक्त भुगतान अथवा अग्राह्य व्यय पाया जाता है तो समिति अपना स्पष्ट अभिमत भी दर्ज करेगी।कार्यालय ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि गैर सूचीबद्ध उपचारों की अनुमन्यता और उनकी दरों का निर्धारण भी यही समिति करेगी। आवश्यकता के अनुसार समिति बैठकें आयोजित कर विभिन्न प्रकरणों की समीक्षा करेगी और अपनी संस्तुतियां अनुमोदन के लिए सक्षम प्राधिकारी को भेजेगी।इस आदेश की प्रतिलिपि पावर कॉरपोरेशन, ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन, राज्य विद्युत उत्पादन निगम, विद्युत वितरण निगमों, विद्युत सेवा आयोग, विद्युत प्रशिक्षण संस्थान तथा अन्य संबंधित अधिकारियों और मान्यता प्राप्त चिकित्सालयों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई है। निगम प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से चिकित्सा दावों के निस्तारण में अधिक पारदर्शिता आएगी, अनियमितताओं पर रोक लगेगी तथा कर्मचारियों और पेंशनरों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं