लखनऊ, । उत्तर प्रदेश में लघु पशुपालन क्षेत्र को नई दिशा देने के उद्देश्य से पहली बार पशुपालन विभाग एवं एनडीडीबी (राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड) के संयुक्त तत्वावधान में ‘यू.पी. स्मॉल लाइवस्टॉक कॉन्क्लेव-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। दो दिवसीय यह कॉन्क्लेव 17 एवं 18 जून 2026 को गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मॉर्स ऑडिटोरियम में आयोजित होगा। कार्यक्रम का उद्देश्य भेड़, बकरी एवं सूकर पालन क्षेत्र के समग्र विकास, रोजगार सृजन, उद्यमिता संवर्धन तथा पशुपालकों की आय में वृद्धि के लिए नई संभावनाओं को तलाशना है।कॉन्क्लेव का उद्घाटन प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह तथा राज्यमंत्री कृष्णा पासवान द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम भी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में देश के प्रमुख अनुसंधान संस्थानों, कृषि एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालयों, उद्योग जगत, स्टार्टअप्स, वित्तीय संस्थानों, स्वयं सहायता समूहों तथा प्रगतिशील पशुपालकों की भागीदारी रहेगी।पशुपालन विभाग के अनुसार यह कॉन्क्लेव लघु पशुपालन से जुड़े हितधारकों को एक साझा मंच प्रदान करेगा, जहां वैज्ञानिक तकनीकों, नवीन अनुसंधानों, व्यवसायिक अवसरों, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, विपणन और निवेश की संभावनाओं पर व्यापक चर्चा की जाएगी। इसके माध्यम से भविष्य की रणनीतियों को अंतिम रूप देने का प्रयास किया जाएगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले और पशुपालकों की आमदनी बढ़ सके।कॉन्क्लेव के पहले दिन 17 जून को ‘लघु पशुपालन : ग्रामीण समृद्धि का आधार’, ‘पोषण सुरक्षा में लघु पशुधन का भविष्य’, ‘लघु पशुधन उद्यमिता, स्टार्टअप एवं निवेश के अवसर’ तथा ‘प्रौद्योगिकी नवाचार एवं आधुनिकीकरण’ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। वहीं दूसरे दिन 18 जून को ग्रामीण प्रसंस्करण क्लस्टर विकास, सूकर पालन में तकनीकी नवाचार, शीत श्रृंखला पैकेजिंग एवं स्मार्ट प्रसंस्करण तकनीक, चारा प्रबंधन एवं मूल्य संवर्धन, तथा सफल पशुपालकों के अनुभव साझा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में भेड़, बकरी और सूकर पालन ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का महत्वपूर्ण साधन बनकर उभर रहा है। ऐसे में यह कॉन्क्लेव आधुनिक तकनीक, बाजार संपर्क और निवेश के नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम के माध्यम से पशुपालकों को वैज्ञानिक पद्धतियों से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें उद्यमी के रूप में विकसित करने पर भी विशेष बल दिया जाएगा।पशुपालन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह आयोजन राज्य में लघु पशुपालन क्षेत्र को संगठित, तकनीक आधारित और लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। इससे न केवल ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, बल्कि प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।