अधिशाषी अभियन्ता से मिलने पहुंचा पेंशनरों का प्रतिनिधि मंडल, समस्याओं के समाधान की मांग

चिकित्सा प्रतिपूर्ति के भुगतान की नई परंपरा बर्दाश्त नहीं- नरेन्द्र बहादुर उपाध्याय
चिकित्सा प्रतिपूर्ति का भुगतान असहज बना रहे हैं अधिकशाषी अधिकारी- पेंशनर

बस्ती, 04 जून। सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसियेशन का एक प्रतिनिधि मंडल पेंशनरों की समस्याओं को लेकर अधिशाषी अभियन्ता बाढ़ खण्ड से मिलने पहंचा। उनकी गैर मौजूदगी मे फोन पर हुई वार्ता के उपरान्त एसोसियेशन के जिलाध्यक्ष नरेन्द्र बहादुर उपाध्याय के निर्देश पर प्रतिनिधि मंडल अधिशाषी अभियन्ता के प्रशासनिक अधिकारी तुलसीराम से मिला और समस्याओं से अवगत कराते हुये अविलम्ब समाधान की मांग की।

श्री उपाध्याय ने बताया कि अधिशाषी अभियन्ता ने व्यस्तता का हवाला देते हुये मिलने से मना कर दिया। फिलहाल प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौपा गया है। नरेन्द्र बहादुर उपाध्याय ने बताया कि बाढ़ खण्ड के अधिशाषी अभियन्ता इंजी. दिनेश कुमार सिचाई विभाग के आहरण वितरण अधिकारी हैं। उन्होने कुछ माह पूर्व एक पत्र जारी कर पेंशनरों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति के भुगतान हेतु दावा प्रस्तुत करने पर सर्वप्रथम उस चिकित्सक/चिकित्सालय को भेजकर परीक्षण कराते हुये सम्बन्धित प्राधिकारी को निर्देशित किया गया है।

इस नई और शासनादेशों को दरकिनार कर बनाई गई व्यवस्था के चलते इलाज कराने के उपरान्त चिकित्सा प्रतिपूर्ति के भुगतान हेतु दर दर भटकना पड़ रहा है। माह फरवरी मे प्रतिनिधि मंडल ने मिलकर उनसे उपरोक्त संदर्भ मे वार्ता किया था। उन्होने आश्वासन दिया था कि भविष्य मे ऐसी शिकायत नही मिलेगी। लेकिन सम्बन्धित अधिकारी अधिशाषी अभियन्ता द्वारा जारी पत्र का हवाला देकर जहां इलाज कराया गया है उस चिकित्सालय को पत्रावली भेजकर परीक्षण कराने की नई परंपरा चला रहे हैं। जबकि शासनादेशों में स्पष्ट उल्लेख है कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति का दावा प्रस्तुत करने के बाद 10 दिनों के भीतर तकनीकी परीक्षण हेतु सक्षम अधिकारी को भेजा जाये।

उसे परीक्षण के उपरान्त 15 दिनों के भीतर कार्यालय अध्यक्ष को वापस कर दिया जाये जिससे भुगतान की प्रक्रिया सम्पन्न हो। किन्तु शासनादेशों की अनदेखी कर स्थितियों को असहज किया जा रहा है जो पेंशनरों के आर्थिक व मानसिक उत्पीड़न की मंशा को रेखांकित करता है। उन्होने कहा कि पटल सहायक द्वारा चिकित्सा प्रतिपूर्ति के नाम पर फर्जी भुगतान कराकर लाभ अर्जित किया जा रहा था, जो अधिकारियों के संरक्षण मे हो रहा था। इस नियोजित भ्रष्टाचार की कीमत पेंशनरों को चुकानी पड़ रही है। अधिशाषी अभियन्ता पेंशनरों के उत्पीड़न के लिये नई परंपरा विकसित कर रहे है जो बर्दाश्त नही किया जायेगा। इससे पेंशनरों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति का लाभ लेने मे भारी परेशानी हो रही है इसलिये 21 नवम्बर 2025 को जारी नया मनगढ़न्त आदेश रद करते हुये पूर्व की व्यवस्था लागू की जाये। प्रतिनिधि मंडल मे सुरेशधर दूबे, नरेन्द्रदेव मिश्र, राध्येश्याम तिवारी, श्रीगोपाल तिवारी, कुलभूषण अग्रहरि, अरूण कुमार पाण्डेय, बलराम यादव एवं छोटेलाल यादव आदि शामिल थे।