ग़ज़ल
तेरे उरूज से मेरा,ज़वाल अच्छा है,
किया है तू ने जो मुझ से सवाल,अच्छा है।
कहा है मुझ से नजूमी ने साल अच्छा है,
ग़ज़ल कमज़ोर है लेकिन ख़्याल,अच्छा है।
तुम्हारे ख़त ने बहुत ही रुला दिया मुझ को,
मगर जो भेजा है तुम ने रूमाल,अच्छा है।
चलो अच्छा हुआ भोपाल ने जगाया तो,
लहू में आ गया सब के उबाल,अच्छा है।
बहुत नदीम की तारीफ सुनी है हम ने,
सुना है आदमी है बेमिसाल,अच्छा है।
नदीम अब्बासी “नदीम”
गोरखपुर॥