• कुदरहा ब्लाक के हथियांव चौराहे पर चल रही नौ दिवसीय श्रीराम महायज्ञ
कुदरहा,बस्ती। कुदरहा ब्लाक के हथियांव चौराहे पर नौ दिवसीय श्रीराम महायज्ञ में भरथ-चरित्र प्रसंग सुन श्रोताओं के आंखों से आंसू छलक उठा। महाराज भरत के त्याग, वैराग्य और भगवान के प्रति अटूट भक्ति का विस्तार से वर्णन करते हुए अयोध्या धाम से पधारे कथावाचक लक्ष्मण दास जी महाराज ने कहा कि सांसारिक मोह-माया क्षणभंगुर है और जीवन का उद्देश्य आत्मकल्याण एवं ईश्वर प्राप्ति है। मनुष्य को मोह-माया से दूर रहकर ईश्वर भक्ति में जीवन को समर्पित कर देना चाहिए। महाराज भरत अत्यंत प्रतापी एवं धर्मपरायण राजा थे। उन्होंने प्रजा का पालन पुत्रवत के रूप में किया और जीवन के उत्तरार्ध में राजपाट त्यागकर वन में तपस्या करने चले गये। वन में भगवान की भक्ति करते समय उनका मन एक मृग शावक के प्रति अत्यधिक आसक्त हो गया। इसी मोह के कारण अगले जन्म में उन्हें मृग योनि प्राप्त हुई। इसके बाद भी भगवान के प्रति उनकी भक्ति बनी रही और अगले जन्म में जड़भरत के रूप में उन्होंने संसार को वैराग्य और आत्मज्ञान का संदेश दिया।
कथा को विस्तार देते हुए कहा कि मनुष्य को अपने कर्म करते हुए किसी भी प्रकार के मोह में नहीं फंसना चाहिए। अत्यधिक आसक्ति ही दुख का कारण बनती है। भगवान की सच्ची भक्ति और सत्कर्म ही मनुष्य को मोक्ष की तरफ ले जाती हैं। महराज ने सभी भक्तों से अपने जीवन में सदाचार, संयम और भक्ति को अपनाने का आह्वान किया।
भागवत कथा कल्प वृक्ष के समान- सानिध्य शुक्ला जी महराज: ईश्वर से संबंध जोड़कर हम हमेंशा के लिए उन्हें अपना सकते है। भागवत कथा कल्प बृक्ष के समान है। इसकी सार्थकता तभी सिद्ध होती है जब इसे हम अपने जीवन व व्यवहार में उतारे। अन्यथा यह कथा केवल मनोरंजन मात्र बनकर रह जायेगी। भगवत कथा से मन का शुद्धकरण होता है। इससे संशय दूर होता है और मन को शांति व मुक्ति मिलती है।
उक्त सुविचार अयोध्या धाम से पधारे कथा वाचक लक्ष्मण दास महराज ने हथियांव में चल रही श्रीराम महायज्ञ में व्यास पीठ से प्रवचन सत्र में व्यक्त किया। कथा को विस्तार देते हुए कहा कि भगवत कथा मनुष्य को सत्य सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। भगवान श्री कृष्णा और सुदामा की मित्रता के प्रसंग को विस्तार से बताया।
कथा में श्याम सुंदर चौधरी, राकेश कुमार सिंह, कुंदन सिंह, रणविजय सिंह, शैलेश चौधरी, विश्वनाथ, महेंद्र सिंह, बब्बन सिंह, पंकज चौधरी, कृष्ण कुमार सिंह, सिपाही चौधरी, पतिराम, लल्लन सिंह, रामगोपाल, विक्रम चौधरी, वीरेंद्र, अशोक चौधरी सहित तमाम भक्त मौजूद रहे।
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