लखनऊ, उत्तर प्रदेश के दुग्धशाला विकास विभाग की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मार्स सभागार में दो दिवसीय ‘दुग्ध स्वर्ण महोत्सव 2026’ का भव्य शुभारम्भ पशुधन, दुग्ध विकास एवं राजनैतिक पेंशन मंत्री धर्मपाल सिंह द्वारा किया गया। महोत्सव के दौरान डेयरी क्षेत्र में पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था के माध्यम से इच्छुक निवेशकों के साथ लगभग 5,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर सहमति की गई।इस अवसर पर मंत्री धर्मपाल सिंह ने दुग्धशाला विकास विभाग के 50 वर्ष पूर्ण होने पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डेयरी क्षेत्र प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। यह क्षेत्र रोजगार सृजन का प्रमुख माध्यम होने के साथ राज्य के सकल मूल्यवर्धन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य के सकल मूल्यवर्धन में लगभग 1.72 लाख करोड़ रुपये का योगदान डेयरी क्षेत्र से हो रहा है। अब तक विभाग द्वारा दुग्ध विकास क्षेत्र में 25,000 करोड़ रुपये से अधिक के 796 एमओयू संपादित किए जा चुके हैं, जिनसे 60,000 से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है।उन्होंने बताया कि ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी-5.0 के अंतर्गत डेयरी सेक्टर में 2,000 करोड़ रुपये की 72 परियोजनाओं का शुभारम्भ किया गया, जिनसे लगभग 4,000 रोजगार सृजित हुए हैं। इसके साथ ही आज 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के 59 नए एमओयू विभिन्न डेयरी संस्थानों के साथ किए जा रहे हैं, जिनसे 13,000 से अधिक रोजगार सृजन का अनुमान है।मंत्री ने बताया कि नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत अब तक 10,000 से अधिक लाभार्थियों को 84 करोड़ रुपये की धनराशि अनुदान के रूप में सीधे बैंक खातों में हस्तांतरित की गई है। साथ ही 4,000 से अधिक प्रारम्भिक दुग्ध सहकारी समितियों का गठन कर लगभग 1.50 लाख दुग्ध उत्पादकों को जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने में दुग्ध विकास विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है।उन्होंने बताया कि वर्ष 2016-17 में प्रदेश में 277.70 लाख मीट्रिक टन दुग्ध उत्पादन तथा प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 352 ग्राम प्रतिदिन थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1836.85 लाख मीट्रिक टन और प्रति व्यक्ति 450 ग्राम प्रतिदिन हो गई है। राज्य सरकार किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।महोत्सव के दौरान विभिन्न निजी डेयरियों एवं संस्थानों द्वारा अपने उत्पादों और तकनीकों का प्रदर्शन किया गया तथा कई कंपनियों ने नए उत्पादों का शुभारम्भ भी किया। कार्यक्रम में लगभग 10 हजार पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों एवं निवेशकों की सहभागिता सुनिश्चित की गई। वेब प्रसारण के माध्यम से प्रदेश के सभी जनपदों सहित देश-विदेश के उद्यमियों और पशुपालकों को भी जोड़ा गया, जहां विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न योजनाओं, नवीन तकनीकों और स्वदेशी नस्ल के पशुपालन से संबंधित जानकारी साझा की गई।कार्यक्रम में विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले पशुपालकों एवं उद्यमियों को सम्मानित किया गया। साथ ही वर्ष 2024-25 के नन्द बाबा पुरस्कार के अंतर्गत चयनित 139 लाभार्थियों को धनराशि सीधे उनके खातों में हस्तांतरित की गई। इसके अतिरिक्त नन्द बाबा दुग्ध मिशन एवं दुग्ध नीति-2022 से लाभान्वित पशुपालकों और निवेशकों की सफलता की कहानियों पर आधारित एक संग्रह पुस्तिका का भी विमोचन किया गया।इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम, आर्थिक सलाहकार के.वी. राजू, दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ एवं बड़ी संख्या में पशुपालक और उद्यमी उपस्थित रहे।