लखनऊ/गोरखपुर । योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सुरक्षा सुशासन की पहली शर्त है और प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षा उपलब्ध कराना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पुलिस के आरक्षी, उपनिरीक्षक, निरीक्षक तथा पुलिस उपाधीक्षक जैसे कार्मिक समाज के बीच से ही आते हैं और जब वे भर्ती एवं प्रशिक्षण के बाद पुलिस विभाग में कार्य प्रारम्भ करते हैं, तो उनके लिए उच्च स्तर की अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।मुख्यमंत्री गोरखपुर जनपद में गोरखनाथ मंदिर क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 9.18 करोड़ रुपये से अधिक लागत से निर्मित अपर पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक कार्यालय, नियंत्रण कक्ष, पुलिस भंडार कक्ष तथा अनुरक्षण कार्यशाला सहित दो आधुनिक सुरक्षा भवनों का उद्घाटन करने के उपरांत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने सुरक्षा भवनों में उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं का अवलोकन भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखनाथ मंदिर के समीप निर्मित यह सुरक्षा भवन एक आदर्श मॉडल के रूप में विकसित हो रहा है। पूर्व में सुरक्षाकर्मियों को ठहरने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब पुलिसकर्मियों, सामान्य अतिथियों और नागरिकों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि यही मॉडल सुशासन और विकसित भारत की संकल्पना को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा। इस भवन में लगभग 100 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी एक साथ ठहर सकेंगे। साथ ही यहां पुलिस अधीक्षक (सुरक्षा) का कार्यालय स्थापित किया गया है तथा पुलिस उपाधीक्षक, निरीक्षक, उपनिरीक्षक और अन्य सुरक्षाबलों के लिए आवासीय सुविधा, भोजनालय, कार्यालय और बैठक कक्ष जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पिछले नौ वर्षों में दो लाख 19 हजार से अधिक पुलिस कार्मिकों की भर्ती पूरी की है। वर्ष 2017 से पहले पुलिस विभाग में बड़ी संख्या में पद रिक्त रहते थे और प्रशिक्षण की क्षमता एक समय में तीन हजार से अधिक नहीं थी। वर्तमान में पुलिस अवस्थापना सुविधाओं के विकास के कारण एक साथ 60 हजार से अधिक पुलिस कार्मिकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जो समय पर लिए गए निर्णयों और संसाधनों के विस्तार का परिणाम है।उन्होंने कहा कि पहले थाना, चौकी, पुलिस लाइन और पीएसी वाहिनियों में पुलिस कार्मिकों के लिए पर्याप्त आवासीय सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं, जिसके कारण उन्हें किराये के मकानों में रहना पड़ता था। अब प्रत्येक पुलिस लाइन में लगभग 200 पुलिस कार्मिकों के लिए आवासीय सुविधाएं विकसित की गई हैं तथा महिला और पुरुष पुलिस कार्मिकों के लिए अलग-अलग बैरकों का निर्माण कराया गया है। प्रत्येक थाने में भी महिला एवं पुरुष कार्मिकों के लिए पृथक बैरकों की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के 55 जनपदों में पुलिस बैरकों की बहुमंजिला इमारतें और ऊंचे टावर निर्मित किए गए हैं, जहां पुलिसकर्मी बेहतर सुविधाओं के साथ निवास कर रहे हैं और अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन कर रहे हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखनाथ थाना का भव्य भवन सभी के लिए एक आदर्श उदाहरण है और भविष्य में इसी प्रकार के आधुनिक थानों का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अग्निशमन केंद्रों के विकास के साथ-साथ पुलिस अवस्थापना सुविधाओं में तेजी से सुधार हुआ है, जिससे कार्मिकों के कार्य की गति बढ़ी है और प्रदेश में सुरक्षा का बेहतर वातावरण स्थापित हुआ है। यही बेहतर सुरक्षा व्यवस्था प्रदेश में सुशासन के मॉडल को मजबूत बना रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले कई थानों में बैरक और अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण अपराधियों को रखने में कठिनाई होती थी, लेकिन अब थानों में पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध होने से अपराधियों को सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक थाने में पर्याप्त संख्या में पुलिस कार्मिकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जिससे किसी भी आपात स्थिति का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।कार्यक्रम को मंगलेश श्रीवास्तव, महापौर गोरखपुर ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र सिंह, विधायक महेंद्र पाल सिंह, विपिन सिंह, प्रदीप शुक्ला, सरवन निषाद तथा मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी सहित अन्य जनप्रतिनिधि और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।