संस्कारयुक्त, बाल केन्द्रित, क्रिया आधारित शिक्षा ही विद्याभारती का लक्ष्य – हेमचन्द्र
प्रधानाचार्य कार्ययोजना बैठक का उद्घाटन सम्पन्न
बस्ती। सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, रामबाग-बस्ती में आज शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत द्वारा आयोजित तीन दिवसीय प्रधानाचार्य कार्ययोजना बैठक का उद्घाटन के साथ शुभारम्भ हो गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री मा. हेमचन्द्र जी रहे। शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त के प्रदेश निरीक्षक मा. रामसिंह जी की भी मंच पर गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम एवं प्रथम सत्र का प्रारम्भ माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, पुष्पार्चन व वन्दना से हुआ। मंच पर उपस्थित अतिथियों का परिचय एवं स्वागत सरस्वती विद्या मंदिर रामबाग के प्रधानाचार्य श्री गोविन्द सिंह द्वारा कराया गया। विद्यालय के भैया श्वेतांशु मिश्र ने ‘ जीवनदीप जले, सब जग को ज्योति मिले’ एकल गीत प्रस्तुत किया।
मुख्य अतिथि मा. हेमचंद्र जी ने सर्व प्रथम इस वर्ष स्थानांतरित हुए एवं नए प्रधानाचार्यों का परिचय लिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सन् 1952 में प्रथम सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना गोरखपुर में हुई, जिसकी विशेषताओं को आज भी सभी देखना चाहते हैं। शिशु मंदिर योजना के मुख्य आधार थे – संस्कारयुक्त , बाल केन्द्रित, क्रिया आधारित और समाज पोषित शिक्षा। यही उद्देश्य लेकर शिशु मंदिर योजनाएं आज भी चल रही हैं। इसी आधार पर हमें योजनाएं बनानी हैं। विद्यालय के पंचप्राण छात्र, आचार्य. अभिभावक, पूर्व छात्र और प्रबंध समिति होते हैं। इन सबके विकास को ध्यान में रखकर हमें वर्ष भर की योजनाएं बनानी हैं और सभी का पंचकोशात्मक अर्थात् सर्वांगीण विकास करना है। विद्यालय का इतिहास भी लिखा जाना चाहिए। इसके लिए हमें स्वयं को तैयार करना होगा। प्रधानाचार्य को भी कम से कम दो कक्षाएं प्रतिदिन लेनी चाहिए।
कार्ययोजना बैठक के द्वितीय सत्र में क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री डॉ. राम मनोहर जी ने उपस्थित प्रधानाचार्य बंधु-भगिनियों को मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने पंचकोष विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि बालक के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक विकास हेतु पंचकोष का संतुलित विकास अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. राम मनोहर जी ने शिशुवाटिका में प्रभावी शिक्षण के लिए तीस प्रकार के क्रियाकलापों की जानकारी देते हुए कहा कि गतिविधि आधारित शिक्षण से बालकों में सीखने की रुचि बढ़ती है तथा संस्कारों का विकास भी सहज रूप से होता है।
इसी क्रम में विभिन्न बिंदुओं पर पाँच स्थानों पर संकुल सह योजना निर्माण का कार्य भी सम्पन्न हुआ। अखिल भारतीय स्तर पर चयनित अटल टिंकरिंग लैब के प्रोजेक्ट बनाने वाले भैयाओं को भी क्षेत्रीय संगठन मंत्री द्वारा सम्मानित किया गया। साथ ही इस उपलब्धि के लिए क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री डॉ. राम मनोहर जी ने सरस्वती विद्या मंदिर रामबाग के प्रधानाचार्य श्री गोविन्द सिंह को भी सम्मानित किया।
बैठक में प्रांत के सभी विद्यालयों से आए हुए प्रधानाचार्य – प्रधानाचार्या, छात्रावास प्रमुख और शिशु वाटिका प्रमुख आचार्य और आचार्या बहनें भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर बलिया के संभाग निरीक्षक श्री कन्हैया चौबे, प्रांत कार्यालय प्रमुख श्री दिलीप श्रीवास्तव, वैदिक गणित प्रमुख हरिकिशुन गिरि आदि भी उपस्थित रहे।