उन्मुक्त उड़ान परिवार ने सुर-सम्राज्ञी आशा भोंसले को आभासी कार्यशाला के माध्यम से दी भावभीनी श्रद्धांजली।
उन्मुक्त उड़ान मंच द्वारा स्वर-साम्राज्ञी आशा भोंसले के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें आभासी माध्यम से भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर मंच के समस्त रचनाकारों ने अपने-अपने सृजन के माध्यम से उनके अद्वितीय संगीत योगदान को नमन किया।
मंच संस्थापिका/ अध्यक्षा/ संचालिका/ संयोजिका व
आयोजन निर्देशिका डॉ दवीना अमर ठकराल देविका ने कहा
स्वर की अमर साधिका, सुरों की अधिष्ठात्री,
आशा भोंसले का जीवन एक अनवरत राग है।
कार्यक्रम में गीत, ग़ज़ल, कविता एवं स्मृति-उद्बोधन के माध्यम से उनके जीवन और कला को स्मरण किया गया। उनकी मधुर, बहुआयामी और अमर आवाज़ ने भारतीय संगीत को जो ऊँचाइयाँ प्रदान कीं, वह सदैव स्मरणीय रहेंगी। उनके गाए गीत पीढ़ी-दर-पीढ़ी श्रोताओं के हृदय में सजीव रहेंगे।
मंच की अध्यक्षा एवं वरिष्ठ सदस्यों ने अपने उद्बोधन में कहा कि आशा भोंसले जी केवल एक गायिका नहीं, बल्कि संगीत की जीवंत विरासत थीं, जिन्होंने हर भाव – श्रृंगार, विरह, भक्ति और उत्साह, को अपने स्वरों में पिरोया।
इस श्रद्धांजलि सभा में रचनाकारों ने उनकी स्मृति में भावभीनी रचनाएँ प्रस्तुत कर अपनी कृतज्ञता प्रकट की। उन्मुक्त उड़ान मंच एवं समस्त रचनाकारों की ओर से हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
“उनकी आवाज़ अमर है, और संगीत के आकाश में सदैव गूँजती रहेगी।” स्व आशा जी के भजन तन तो मंदिर है, ह्र्दय है वृंदावन, वृंदावन में बसे हैं राधिका किशन… और डा. अनीता राजपाल अनु वसुंधरा के आईये मेहरबान बैठिये जानेजान गीत से श्रद्धांजलि कार्यक्रम शुरू हुआ। मंच का संचालन डा. अनीता राजपाल के साथ विशेष शर्मा सुहासिनी ने किया। किरण भाटिया ने स्वरचित कविता लबों पे सुर सरिता बहती, कंठ में सरस्वती का वास, वो है हमारी आशा ताई, दे रहे हम श्रद्धांजलि आज।
अनु तोमर अग्रजा ने उनके गीत – मेरे रोम रोम में बसने बाल राम, जगत के स्वामी, हे अंर्तयामी मैं तुझसे क्या मांगू, से अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करे। डॉ पूनम सिंह सारंगी के स्वरचित भाव, संगीत स्वर सम्राज्ञी, सात सुरों की मालिनी, सुश्री आशा भोंसले को, श्रद्धांजलि दीजिए के बाद वीना टंडन पुष्करा क़े श्रद्धा सुमन आशा ताई गयी नहीं, हमारे हृदय में बस रही, कर गयी हर स्वांस से सुर साधना, संगीत की देवी सुर में समाहित हो गयी। सुमन किमोठी वसुधा के शब्दों में सात सुरों की, स्वामिनी, आशा था इक नाम। सुर संगम की साधिका,चली गई गोधाम। गूँथकर माला गीत की, मधुर भरी है तान। कष्ट अनेकों हैं सहे, फिर भी थी मुस्कान।। सरोज डिमरी सौम्य के भाव सुर साम्राज्ञी सुर की शान, भारतीय संगीत का बड़ा नाम, उन्मुक्त भाव से गाती गीत, आशा ताई को प्रणाम। नीतू रवि गर्ग कमलिनी के शब्दों में संगीत जगत की साम्राज्ञी स्वर कोकिला हो गयी अब मौन… श्योनाथ सिंह शिव प्रजापति ने आशा जी के विशिष्ट गानों के साथ न मिले संसार तेरा प्यार तो हमारा है, तू है तो हर सहारा है… से अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करे। विनीता नरुला प्रसन्ना के शब्द रखेगा याद तुम को सारा ज़माना। सुरम्य संगीत का अद्भुत खज़ाना।। तुम्हारी वो दिलकश अदा आशा ताई! हर दिल अज़ीज़ बन गया फसाना।। साथ ही आशा जी के गीत ये राते ये मौसम नदी का किनारा को गुनगुनाया। आशा बुटोला सुप्रसन्ना के स्वर में बसे सरस्वती स्वर में जिसके, रचा इतिहास सुरों ने उसके, सुर सागर की एक लहर थी, देकर लाखों मोती तट पर, डूब गई वो लहर सिंधु में और उसके बाद आशा जी का गीत कभी तो नज़र मिलाओ… को मंच पर गाया। डॉ .स्वर्णलता सोन कोकिला ने अपनी कविता – गयी हो छोड़ गीत के प्राण, है तुझ बिन सूनी, मन की तान। धड़कन से संगीत गया है, जीवन जैसे बीत गया है, दूर हुई सबके चेहरे से, देख आज मुस्कान के साथ आशा जी की एक मेडली प्रस्तुत करी इन गीतों के साथ – चैन से हमको कभी… आगे भी जाने न तू… । रेखा पुरोहित तरंगिणी ने अपनी घनाक्षरी सबके ह्र्दय घर, संगीत की धरोहर, सदा रहेगी अमर, सुर मलिका मान है…. से श्रद्धा कुसुम अर्पित करे। अरुण ठाकर जिंदगी, कवित्त अश्रुओं की धार नयनों में लिए , गीत संगीत बिखरा बिखरा। छोड़ चली आशा ताई , इतिहास अमर हर गान हुआ, के साथ चुनिंदा गीतों को प्रस्तुत करा। रंजना बिनानी काव्या ने चुरा लिया है तुमने जो दिल को, गीत से सबका ह्र्दय मोह्ते हुये सुरों की रानी मधुरता की निशानी … शब्दों के संग अपनी श्रद्धांजलि अर्पण करी।
अशोक दोशी दिवाकर ने आशा जी के गीतों की पंक्तियों संग अपनी घनाक्षरी – बहुत सुंदर सुर, आवाज थी वो मधुर, छोड़ दी दुनिया फानी, आशाजी अमर है से आशाजी को नमन किया। सुनील भारती आज़ाद ने अपने मधुर स्वर स्वर में आशाजी और किशोर जी का गीत ये क्या बात है आज की चांदनी में कि हम खो गये प्यार की रगिनी में.. गाकर अपने ह्र्दय के उद्गार व्यक्त करे। डा0 फूलचंद्र विश्वकर्मा भास्कर के शब्दों में हुई खामोश इक आवाज़ आज दुनिया की। सुरों की मल्लिका आशा बेताज़ दुनिया की।।
संजीव कुमार भटनागर सजग, ने अपनी एक मुलाकात का जिक्र किया और आशा जी के जीवन की एक कहानी सुनायी जो बंदिनी के गीत – अब के बरस भेजो भैया को बाबुल … से जुड़ी हुई थी उसके बाद अपना स्वरचित गीत जो हम दोनों फिल्म के गीत पर आधारित है – अभी न जाओ छोड़कर, कि दिल अभी भरा नहीं, शब्द आशा की रागिनी से, मन अभी भरा नहीं… से आशाजी का वंदन करा। डा0 अनीता राजपाल ने कहा नज़ाकत में लिपटी मखमली अवाज़ … के बाद सभी के बचपन का गीत चंदा मामा दूर के पुये पकाये भूर के … सुनाया जो सभी रचनाकारों को उनके बचपन में ले गया। विशेष शर्मा सुहासिनी के अनुसार वो सुर नहीं इतिहास थी, हर गीत में डूबी मिठास थीं। सुरों की झंकार खनकती थी उनकी हर सरगम में, वो उम्र नहीं, आवाज थीं..जो वक्त से आगे चलती थी। नीरजा दीदी के भाव आशा के गीतों के फूलों की माला बनाई उनको अपने मन मंदिर में चढ़ाई मँच की अध्यक्षा संरक्षिका डा. दवीना अमर ठकराल देविका ने गीतों की मेडली – इक परदेसी मेरा दिल ले गया…. ये रातें ये मौसम नदी का किनारा… उड़े जब जब ज़ुल्फे तेरी… छोड़ दो
आँचल ज़माना क्या कहेगा..अच्छा जी मैं हारी चलो मान जाओ ना…हाल कैसा है जनाब का ….जहाँ में ऐसा कौन है कि जिसको गम मिला नहीं….आधा है चंद्रमा रात आधी…..सर पर टोपी लाल…निगाहें मिलाने को जी चाहता है ….नाना नाना मेरी बेरी के बेर मत तोड़ो …तुम जियो हज़ारों साल ….इशारों इशारों में दिल लेने वाले…पर्दे में रहने दो पर्दा न उठाओ….दादी अम्मा दादी अम्मा….मैं चली मैं चली देखो प्यार की गली…झुमका गिरा रे बरेली के बाज़ार में…आदि से मन मोहते हुये आशाजी को श्रद्धांजली अर्पित की । अंत में सुरेशचंद्र जोशी सहयोगी ने आशा जी के जीवन के कुछ अनछुये पहलुओं से अवगत कराया और जिस पर केवल नहीं हिन्द को, था सारी दुनिया को नाज। आठ दशक तक फिल्म जगत में, जिसने किया सुरों से राज से श्रद्धांजलि कार्यक्रम का समापन किया। कार्यक्रम की विशेषता जहाँ एक ओर स्व आशा जी के गीत और उनके जीवन के महत्वपूर्ण क्षणो को काव्यात्मक अभिव्यक्ति से संजोया गया, वहीं दूसरी ओर डॉ दवीना द्वारा हर रचनाकार की प्रस्तुति की समीक्षा और उनका परिचय एक अनूठा समाँ बना गया।