इंसानियत
जब पराई पीड़ा देख
आँखें नम हो जाएं,
और चुपचाप दिल किसी
बोझ को ढो जाए।
जब भूले-बिसरे से प्राणी
में भी अपनापन दिखे,
और कुत्ते की आँखों में
सवाल बनकर चुप्पी झलके।
जब बोल न पाने वालों
की चुप्पी सुनाई दे,
और बिना कहे मदद
की राह दिखाई दे।
तब समझ लेना,
साँसों में बस जान नहीं,
उस पल तुम सच में इंसान हो—
सिर्फ नाम नहीं।
राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
जगदलपुर राजिम
छत्तीसगढ़