श्री हनुमान स्तुति 

श्री हनुमान स्तुति

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जयति श्री अंजरी केसरी लाल,

जयति श्री राम सिया के पाल।=2

 

रोम में राम बसे हैं प्रीत,

“जय श्रीराम” कहै नित नित,

राम भगत बनते हैं इनके मीत,

विकट है रूप…तेज अनूप… है शिव स्वरूप…।

डरते हैं कालो के भी काल… ।।1।। जयति श्री…।

 

अंजनी सुत बनकर के आयो,

मारुति नंदन जग में कहायो,

रामभक्त बनकर के छायो,

केसरी नंदन… प्रिय है बंदन…करूं मैं वंदन…।

दुष्टों को करते हैं बेहाल…।।2।। जयति श्री…।।

 

निकट भूत प्रेत ना भटके,

ले जो नाम इनका रट के,

पूर्ण हो काज सारे अटके,

हे कपिशूर… विध्न करें दूर… दर्प करें चूर…।

निज कृपा करें हमें निहाल…।।3।। जयति श्री…।

 

कब से नाथ मैं पुकारूं,

नित आरती उतारूं,

काहू के अहित न मैं चाहूं,

हे हनुमान… रख लिजै मान…करूं गुणगान…।

शिखा की सुन लिजै हर हाल…।।4।। जयति श्री…।

जयति श्री अंजरी केसरी लाल,

जयति श्री राम सिया के पाल।=2

 

 

डॉ. शिखा गोस्वामी “निहारिका”

छत्तीसगढ़