,,,,,,,,,,,,,,ईद मुबारक,,,,,,,
आई है ईद दिल में उमंगें लिए हुए, खुशियों की मीठी मीठी तरंगें लिए हुए, सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,,,,,,,,
अनुराग लक्ष्य, 21 मार्च
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
आई है ईद दिल में उमंगें लिए हुए,
खुशियों की मीठी मीठी तरंगें लिए हुए ।
चाहत की डोर थामे चलो आसमाँ में हम,
उड़ जाएं उल्फतों की पतंगें लिए हुए।।
जी हाँ, मुकद्दस रमज़ान का महीना आखिरकार हमसे जुड़ा हो गया और ईद अपने दामन में हज़ार खुशियां लेकर आलम ए इस्लाम पर छा गई।
बाजारों में रौनकें लौट आई हैं। रोज़ेदार अपने बच्चों की खुशियों को दोबाला करने के लिए उनकी मनपसंद चीज़ों की खरीदारी में मसरूफ दिखाई दिए। लेकिन ईद के मौके पर जो रौनक बाजारों में दिखाई देती है, वोह नहीं दिखाई दी।
दुकानदारों ने मायूसी जताई और कहा कि समझ से परे है कि अगर ईद मुबारक के इस सुनहरे मौके पर दुकानदारी बिल्कुल आधे से भी कम है।
कई दुकानदारों ने यह शिकायत की , कि आज चाँद रात के मौके पर भी आशा के विपरीत दुकानदारी चल रही है। जो आने वाले समय में कई सवालिया प्रश्न खड़े कर रही है कि आगे दुकानदारी का क्या होगा।
मस्जिदों में ईद की नमाज़ को लेकर पुलिस प्रशाशन रात से अपनी ड्यूटी को अंजाम देने में तत्पर दिखाई दी।
बहरहाल अनुराग लक्ष्य परिवार समस्त देश वासियों को ईद की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए देश में एकता, भाईचारे को आम करने की बात कही साथ ही मुल्क में गंगा जमुनी तहज़ीब को आम करते हुए सलीम बस्तवी अज़ीज़ी की इन पंक्तियों को भी नज़र अंदाज़ नहीं किया जा सकता है कि,
वोह अपनी ईद में तुझको अगर बुलाता है,
तो तेरी होली में अब भी गुलाल लेता है।
मिटाने के लिए नफरत दिलों से इन्साँ के,
यहाँ तलक कि वोह पूजा की थाल लेता है ।।
और इसी के साथ यह भी ज़रूरी है कि,
हमारे और तुम्हारे दरमियाँ गर प्यार हो जाए,
हर इक जानिब मोहब्बत की ज़मीं हमवार हो जाए।
जहाँ पर बैठकर हम भूल जाएं मंदिर ओ मस्जिद,
करो कोशिश खड़ी ऐसी कोई मीनार हो जाए ।।