अयोध्या, 20 मार्च। रामनगरी में आध्यात्मिक आस्था का एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। श्री राम जन्मभूमि मंदिर में गुरुवार को विधि-विधान के साथ दिव्य ‘श्री राम यंत्र’ की स्थापना सम्पन्न हो गई। इस पावन अवसर पर संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
सनातन परंपरा में यंत्र, मंत्र और विग्रह उपासना को मोक्ष और कैवल्य ज्ञान का माध्यम माना जाता है। इसी परंपरा के अनुरूप स्थापित यह ‘श्री राम यंत्र’ 3×3 फुट आकार का तांबे से निर्मित एवं स्वर्ण-लेपित है, जो भगवान श्रीराम के दिव्य स्वरूप का प्रतीक माना जा रहा है।
धार्मिक परंपरा के अनुसार आदि शंकराचार्य द्वारा देश के विभिन्न मंदिरों में यंत्र प्रतिष्ठा की परंपरा स्थापित की गई थी। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शंकर विजयेन्द्र सरस्वती (कांची कामकोटि पीठ के 70वें जगद्गुरु) के आशीर्वाद से इस यंत्र की स्थापना की गई है।
यह यंत्र कांचीपुरम के प्राचीन मंदिर में पूजित ‘श्री राम यंत्र’ के आधार पर विशेष रूप से तैयार किया गया है। स्थापना से पूर्व इसे देशव्यापी ‘श्री राम यंत्र रथ यात्रा’ के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया गया। 27 अक्टूबर 2024 को तिरुपति से प्रारंभ हुई यह यात्रा कई राज्यों और नेपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों से होते हुए अयोध्या पहुंची थी।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस ‘श्री राम यंत्र’ की स्थापना से अयोध्या में सुख-समृद्धि, आध्यात्मिक ऊर्जा और ‘राम चैतन्य’ का प्रसार होगा। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह यंत्र रामभक्तों के लिए विशेष आस्था और प्रेरणा का केंद्र बनेगा।