सीएमओ की मौजूदगी में आकांक्षी ब्लॉक हुजूरपुर में आशाओं को आवश्यक सामग्री वितरित की गई

सीएमओ की मौजूदगी में आकांक्षी ब्लॉक हुजूरपुर में आशाओं को आवश्यक सामग्री वितरित की गई

जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी संजीवनी

वीएचएसएनडी सत्रों के लिए आशाओं को मिलीं 17 प्रकार की सामग्रियां

1.12 लाख से अधिक लाभार्थी होंगे हर माह लाभान्वित

 

बहराइच 16 मार्च। ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले वीएचएसएनडी (ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस) सत्रों को अब और अधिक प्रभावी व सुदृढ़ बनाया जा रहा है। सत्रों में संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए सीएमओ की विशेष पहल पर ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समिति (वीएचएसएनसी) फंड का उपयोग किया गया है। इसके तहत जिले की आशा कार्यकर्ताओं को 17 प्रकार की आवश्यक सामग्रियां उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सीधा सुधार देखने को मिलेगा।

डीसीपीएम मो. राशिद ने बताया कि जिले के सभी राजस्व ग्रामों में प्रत्येक माह के बुधवार और शनिवार को 4500 सार्वजनिक स्थानों पर वीएचएसएनडी सत्र आयोजित किए जाते हैं। इनके माध्यम से करीब 1.12 लाख से अधिक लाभार्थियों, जिनमें गर्भवती महिलाएं, धात्री माताएं और बच्चे शामिल हैं, उन्हें टीकाकरण, पोषण परामर्श और स्वास्थ्य जांच की सुविधाएं दी जाती हैं। पहले कई स्थानों पर आवश्यक संसाधनों की कमी से सत्रों के संचालन में दिक्कतें आती थीं, जिसे अब दूर कर लिया गया है।

डीसीपीएम ने बताया कि वीएचएसएनसी फंड का संचालन ग्राम प्रधान और आशा के संयुक्त हस्ताक्षर से होता है। सरकार इसमें हर साल 10 हजार रुपये देती है। इस वर्ष इस फंड से सत्रों को बेहतर बनाने के लिए जरूरी उपकरण खरीदे गए हैं। डीसीपीएम ने बताया कि इस फंड से आशाओं के लिए 17 प्रकार की जरूरी वस्तुएं खरीदी गई हैं। इनमें कुर्सी, मेज, हैंगिंग स्केल, एमयूएसी टेप, चटाई, टॉर्च, बैग, टीकाकरण ट्रैकिंग रजिस्टर, बाल्टी, मग, कूड़ेदान, जग-गिलास सेट, वैक्सीन रखने की ट्रे, पेन पैकेट, थर्मामीटर, बेबी ब्लैंकेट और हैंडवॉश शामिल हैं। नई सामग्रियां पाकर आशा कार्यकर्ताओं में भी खासा उत्साह है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने बताया कि संसाधनों की उपलब्धता से वीएचएसएनडी सत्रों का संचालन अब अधिक व्यवस्थित और सुचारु तरीके से किया जा सकेगा। बच्चों का वजन मापना, कुपोषण की सटीक पहचान करना, टीकाकरण का रिकॉर्ड रखना और स्वच्छता बनाए रखना पहले की तुलना में बहुत आसान हो जाएगा। हमारा उद्देश्य गांवों में ही मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाना है।

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