जो प्रजा शिक्षा से परिपूर्ण होती है उसका परिवार उन्नति करता है- योगेश जी भारद्वाज
बस्ती । पशु, पक्षी कीट पतंगों के अंदर समझ होती है इसलिए वह भोजन और सुरक्षा को साझा करते हैं जैसे मधुमक्खी वहीं मनुष्य ऐसा नहीं करता यह विचार आर्य समाज गांधीनगर बस्ती के वार्षिकोत्सव में व्यक्त करते हुए वैदिक चिंतक योगेश जी भारद्वाज ने कहा कि शिक्षा के साथ मिलकर जन प्रजा हो जाती है प्रजा का तात्पर्य समझदार से है जो प्रजा शिक्षा से परिपूर्ण होती है उसका परिवार उन्नति करता है और बालक अपने माता-पिता के अनुवर्ती होते हैं।
कार्यक्रम में कानपुर से आए वैदिक विद्वान रविंद्र आर्य ने कहा कि परिवार के बड़े बुजुर्गो का जहां सेवा एवं आदर होता है वह परिवार निरंतर आगे बढ़ता रहता है परिवार के सभी लोग सुखी होते हैं आज के दौर में परिवार के लोग एक दूसरे से दूर होते रहे हैं वाणी में संयम नहीं है जिससे आपस में कटुता बढ़ती जा रही है पहले अतिथियों का सत्कार होता था अब ऐसा नहीं है अगर अतिथि घर पर आ जाता है तो लोग चाहते हैं कि वह कितनी जल्दी घर से चला जाए हमें अब पुरानी वैदिक परंपराओं पर लौटने की आवश्यकता है, दिल्ली से आए भजनीक मुकेश शास्त्री ने अपने भजन, धर्म की राह से जो गुजर गए, जिंदगी का सुहाना सफर कर गए, प्रस्तुत कर सबको भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम में ओम प्रकाश आर्य, मुरलीधर भारती, प्रधान बृजेश आर्य, सत्येंद्र वर्मा, कार्यक्रम संचालक घनश्याम सिंह, गरुड़ध्वज पांडे, हरिहर मुनि, गिरजा शंकर दूबे, ओमप्रकाश लाल, सुमन आर्य, उमा श्रीवास्तव, रेखा श्रीवास्तव संत मिलन, पंकज त्रिपाठी, सुभाष आर्य, धर्म प्रकाश उपाध्याय, परमात्मा विश्वास सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।