लखनऊ उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार की ओर से राजधानी लखनऊ में एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है, जिसका विषय है “गिनती में आओ: भारत में जनगणना का डाक इतिहास”। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आम नागरिकों को ऐतिहासिक दस्तावेजों से जोड़ते हुए जनगणना के इतिहास को एक नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान करना है।प्रदर्शनी का उद्घाटन 24 फरवरी को दोपहर 12:30 बजे निदेशक जनगणना संचालन एवं नागरिक पंजीकरण शीतल वर्मा द्वारा किया जाएगा। यह प्रदर्शनी 28 फरवरी तक महानगर विस्तार स्थित शहीद स्मारक भवन में आयोजित होगी। आमजन के लिए यह प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक खुली रहेगी।इस प्रदर्शनी की विशेषता यह है कि इसमें डाक टिकटों, पोस्टमार्क, पुराने पत्रों और अन्य डाक अभिलेखों के माध्यम से भारत में जनगणना की यात्रा को प्रस्तुत किया जाएगा। सामान्यतः जनगणना को केवल आंकड़ों के रूप में देखा जाता है, किंतु इस आयोजन में यह बताया जाएगा कि जनगणना की प्रक्रिया में डाक विभाग की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्वतंत्रता के बाद जनगणना संबंधी सूचनाओं के प्रसार, प्रशिक्षण सामग्री के वितरण और सरकारी संवाद को जन-जन तक पहुंचाने में डाक तंत्र ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।इस अवसर पर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि देश की विकास यात्रा की आधारशिला है। डाक टिकटों और अभिलेखीय दस्तावेजों के माध्यम से जनगणना के इतिहास को समझाने का यह प्रयास अनूठा है, जो नई पीढ़ी को प्रशासनिक प्रक्रियाओं और ऐतिहासिक विकासक्रम से परिचित कराएगा।प्रदर्शनी का संयोजन अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. विकास कुमार द्वारा किया गया है। यह आयोजन विशेष रूप से छात्रों, शोधकर्ताओं और इतिहास में रुचि रखने वाले नागरिकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा। अभिलेखीय स्रोतों के माध्यम से आधुनिक भारत की संरचना और प्रशासनिक विकास को समझने की नई संभावनाएं इस प्रदर्शनी के जरिए सामने आएंगी।