महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। अपनी मांगों और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए ‘कृष्णानन्द फाउण्डेशन ई-रिक्शा यूनियन’ और ‘श्री अयोध्या जी ई-रिक्शा कल्याण समिति ट्रस्ट’ के बैनर तले ई-रिक्शा चालकों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। इस विरोध प्रदर्शन ने अब एक बड़ा रूप ले लिया है, क्योंकि इसमें अयोध्या के मठ-मंदिरों के साधु-संतों और व्हीलचेयर संघ ने भी अपना पूर्ण समर्थन घोषित कर दिया है।
प्रमुख मांगें और विरोध का कारण
यूनियन का स्पष्ट कहना है कि यह अनशन ई-रिक्शा चालकों के मान-सम्मान और उनके स्वाभिमान की रक्षा के लिए है। बैनर पर लगे नारों के माध्यम से चालकों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की है कि उनके साथ होने वाले दुर्व्यवहार को बंद किया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, यह अनवरत आमरण अनशन जारी रहेगा। ठप हुई व्यवस्था, बढ़ी परेशानी ई-रिक्शा के अचानक बंद होने और अनशन पर बैठने के कारण धर्मनगरी अयोध्या की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। श्रद्धालुओं की मुसीबत: दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं को एक मंदिर से दूसरे मंदिर जाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। स्थानीय नागरिक दफ्तर, बाजार और स्कूल जाने वाले स्थानीय लोगों को भी कोई वैकल्पिक साधन न मिलने के कारण पैदल चलना पड़ रहा है। व्हीलचेयर संघ का साथ चूंकि व्हीलचेयर संघ भी इस हड़ताल में शामिल है, इसलिए बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए दर्शन करना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। ई-रिक्शा चालकों के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं होगा। जब तक प्रशासन हमारी जायज मांगें नहीं मानता, तब तक हम अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं करेंगे।” — मुकुन्द ‘माधव’ त्रिपाठी (संस्थापक, ई-रिक्शा यूनियन) प्रशासन की चुप्पी
फिलहाल खबर लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। ई-रिक्शा चालकों की संख्या और उन्हें मिल रहे सामाजिक समर्थन को देखते हुए शहर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे।