एक शाम बेटियों के नाम: सावित्रीबाई फुले को नमन
प्रथम भारतीय महिला शिक्षिका, आपको शत-शत नमन,
अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर, किया राष्ट्र का सिंचन।
महान समाज सेविका, महिला सशक्तिकरण की प्रतीक,
सावित्रीबाई फुले, आपकी जयंती पर शत-शत प्रणाम!
लोगों ने फेंके पत्थर, पर आप रुकी नहीं,
कीचड़ फेंका साड़ी पर, पर आप झुकी नहीं।
जब हमारी देश की बेटी, सावित्रीबाई नहीं रुकी,
तभी तो आज हर घर में, कलम की लौ है जली।
आपकी ही बदौलत, आज हमारी माँ, हमारी चाची,
हमारी बेटियां, कलम चलाकर देश चलाना सीख गईं।
निर्मला सीतारमण जैसी महिलाएँ, कलम से बजट पास करा गईं,
देश चलाना सिखा गईं, ऊँची उड़ानें भरना सिखा गईं।
एवरेस्ट की चोटी पर, तिरंगा फहराना सिखा गईं,
अंगूठा छाप छोड़कर, कलम से हस्ताक्षर करना सिखा गईं।
आज हमारी बेटियां, हर क्षेत्र में परचम लहराती हैं,
बेटी बनकर, बहू बनकर, घर को जोड़ना सिखाती हैं।
तीन जनवरी, भारत की बेटियों को शिक्षित कर गई,
आज उनकी जयंती पर, बेटियों को पढ़ाइए, आगे बढ़ाइए।
बंगाल की महिलाओं के हाथों में भी अब कलम है,
नई-नई रचनाएँ लिख रही हैं, यही उनका बल है।
इच्छुक महिलाएँ फिर से पढ़ रही हैं, सीख रही हैं,
धन्य हैं हमारी सावित्रीबाई दीदी, जिन्होंने हमें शिक्षित किया।
यह शाम है बेटियों के नाम, यह शाम है उनके सम्मान में,
सावित्रीबाई फुले अमर रहें, हम सब के स्वाभिमान में।
ज्योती वर्णवाल
नवादा (बिहार)
मेरी स्वरचित रचना