वेद का आदेश ही धर्म, वेद की मनाही ही अधर्म” — त्रिभुवन दास जी महाराज

“वेद का आदेश ही धर्म, वेद की मनाही ही अधर्म” — त्रिभुवन दास जी महाराज

 

श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन भिटहा में उमड़ा आस्था का सागर, श्रोता हुए भाव-विभोर

 

जितेन्द्र पाठक

 

नाथनगर ब्लॉक के ग्राम भिटहा स्थित चतुर्वेदी विला में चल रही नौ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन रविवार को कथा व्यास त्रिभुवन दास जी महाराज ने धर्म–अधर्म का गूढ़ संदेश देते हुए कहा कि “वेद जो करने को कहे वही धर्म है, और जो करने से रोक दे वही अधर्म”। उन्होंने बताया कि मनुष्य अपनी इंद्रियों के वश में होकर परमात्मा की भक्ति से दूर होता जाता है, जबकि भक्ति ही मानव जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य है।

 

महाराज जी ने भगवान के विभिन्न अवतार — वाराह, नरसिंह और वामन की दिव्य कथाओं का वर्णन करते हुए भक्तों को धर्ममार्ग पर चलने का संदेश दिया। इसके बाद उन्होंने सतयुग में प्रभु श्रीराम के अवतार कथा का भावपूर्ण वर्णन किया, जिस पर पूरा पांडाल “जय श्रीराम” के जयकारों से गूंज उठा।

 

कथा के चतुर्थ दिन शनिवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के प्रसंग पर चतुर्वेदी विला बृजमंडल में परिवर्तित हो उठा। जन्मोत्सव के दौरान सैकड़ों भक्त “बांके बिहारी लाल की जय” के कीर्तन में लीन हो गए।

 

मुख्य यजमान चंद्रावती देवी के नेतृत्व में जनार्दन चतुर्वेदी, पूर्व विधायक जय चौबे, डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी, राकेश चतुर्वेदी, डॉ. सत्यम चतुर्वेदी, दिव्येश चतुर्वेदी और रजत चतुर्वेदी ने कथा व्यास और भगवान श्रीकृष्ण की आरती उतारकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

 

कार्यक्रम में सूर्या ग्रुप की एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर सविता चतुर्वेदी, एसआर ग्रुप की एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर शिखा चतुर्वेदी, जिला पंचायत अध्यक्ष बलिराम यादव, मया शंकर पाठक, परमात्मा पांडेय, वेद प्रकाश पांडेय, मनोज पांडेय, अभयानंद सिंह, नितेश द्विवेदी, दिग्विजय यादव, आनंद ओझा समेत सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।