महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या, उत्तर प्रदेश। अयोध्या की वैदिक-शिक्षा परंपरा और संस्कृत-साधना की प्रतिष्ठा को और ऊँचा करते हुए, विप्र संजीवनी परिषद गुरुकुल अयोध्या (संबद्ध-श्री राजगोपाल संस्कृत महाविद्यालय अयोध्या) के छात्र रूपेश दुबे ने एक उत्कृष्ट उपलब्धि दर्ज की है।
राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, भाषा विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित प्रदेश स्तरीय श्लोक-अंत्याक्षरी प्रतियोगिता में महाविद्यालय के उत्तर मध्यमा द्वितीय वर्ष के छात्र रूपेश दुबे ने अपने अद्भुत संस्कृत-स्मरण, वाणी-कौशल और शास्त्रीय दक्षता का परिचय देते हुए द्वितीय स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा में यह प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त करना, छात्र की लगन, अनुशासन, और गुरुकुल परंपरा के संस्कारों का साक्षात प्रमाण है। निर्णायकों ने भी रूपेश की प्रस्तुति की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। महाविद्यालय परिवार और गुरुकुल में हर्ष का माहौल
इस गौरवपूर्ण सफलता पर श्री राजगोपाल संस्कृत महाविद्यालय परिवार एवं विप्र संजीवनी परिषद गुरुकुल समुदाय में हर्ष की लहर है।
महाविद्यालय के प्राचार्य – डॉ. अशोक कुमार पाण्डेय (श्री वत्साचार्य महाराज), जो शिवधाम काशी मंदिर, अयोध्या के पीठाधीश तथा विप्र संजीवनी परिषद गुरुकुल अयोध्या के संस्थापक भी हैं, उन्होंने छात्र रूपेश दुबे को शुभाशीष देते हुए कहा कि संस्कृत भाषा की साधना में दक्ष छात्र ही ऐसे प्रतिष्ठित मंचों पर अपने ज्ञान का उज्ज्वल प्रकाश फैलाते हैं। रूपेश दुबे की यह सफलता भविष्य में संस्कृत-प्रचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रेरणा बनेगी।यह उपलब्धि श्री राजगोपाल संस्कृत महाविद्यालय और विप्र संजीवनी परिषद गुरुकुल अयोध्या के लिए गर्व का विषय बनी हुई है।