लखनऊ उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मार्गदर्शन में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन लगातार ग्रामीण महिलाओं की आजीविका संवर्धन के लिए प्रभावी कदम उठा रहा है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को विभिन्न गतिविधियों से जोड़कर न केवल उनके स्वरोजगार को प्रोत्साहित किया गया है, बल्कि उनकी आमदनी में भी व्यापक वृद्धि हुई है।इसी प्रयास का एक सशक्त उदाहरण है विद्युत सखी कार्यक्रम, जिसने वर्ष 2020 में शुरुआत के बाद से बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। इस कार्यक्रम से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने बिजली बिल वितरण कंपनियों के लिए अब तक 2,400 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व संग्रह कर एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है। बिल कलेक्शन के माध्यम से विद्युत सखियों ने 33.05 करोड़ रुपये से अधिक का कमीशन अर्जित कर यह साबित किया है कि ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होने की अपार क्षमता रखती हैं।जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच कलेक्शन के आधार पर बाराबंकी के रामनगर ब्लॉक की राजश्री शुक्ला सूची में शीर्ष पर रहीं। अमेठी के जगदीशपुर ब्लॉक की सोनी द्विवेदी दूसरे स्थान पर और रामपुर जिले के स्वार ब्लॉक की मिशार जहां तीसरे स्थान पर रहीं। इनके बाद आगरा के खंदौली ब्लॉक की कुसुमलता चौथे, बाराबंकी के फतेहपुर ब्लॉक की लक्ष्मी देवी पांचवें और स्वार ब्लॉक की सविता देवी छठवें नंबर पर रहीं। बागपत की रजनी सातवें, मेरठ के राजपुरा ब्लॉक की संगीता आठवें, बुलंदशहर की गीतारानी नौवें और आगरा के फतेहपुर सीकरी ब्लॉक की विनेश दसवें स्थान पर रहीं।राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अनुसार, शीर्ष पर रही राजश्री शुक्ला ने जनवरी से अक्टूबर की अवधि में 28,567 बिजली बिलों का सफलतापूर्वक कलेक्शन किया, जिससे 701 लाख रुपये से अधिक की धनराशि एकत्र हुई और उन्होंने 7 लाख 54 हजार रुपये से अधिक का कमीशन अर्जित किया। दूसरे स्थान की सोनी द्विवेदी ने 18,416 बिलों से 680 लाख रुपये से अधिक का कलेक्शन कर 7 लाख 22 हजार रुपये से अधिक कमीशन हासिल किया। तीसरे स्थान पर रहीं मिशार जहां ने 19,309 बिलों से 575 लाख रुपये से अधिक की राशि संग्रहित करते हुए 6 लाख 97 हजार रुपये से अधिक का कमीशन कमाया।विद्युत सखी कार्यक्रम ने न केवल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का नया मार्ग खोला है, बल्कि यह भी सिद्ध किया है कि यदि अवसर और सहयोग मिले तो महिलाएं बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल करने में सक्षम हैं।