
खजनी/ गोरखपुर ( अनुराग लक्ष्य न्यूज ) श्रीमद् भागवत महापुराण में भगवान श्री कृष्ण के गृहस्थ लीला का वर्णन हुआ सुदामा चरित्र का वर्णन हुआ सुदामा जी महाराज अपने जीवन में परम संतोषी त्याग और समर्पण के प्रतीक और भगवान श्री कृष्ण के अनन्य सखा थे बचपन में जब सुदामा जी के चरणों में कांटा लगा उसे समय भगवान श्री कृष्ण ने उनके चरणों का कांटा निकाला सुदामा जी ने कहा मैं आपसे मित्रता करना चाहता हूं और भगवान हमेशा भाव और प्रेम की भूखे होते हैं प्रभु श्री कृष्ण और सुदामा की मित्रता अटल हो गई समय व्यतीत होता रहा गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात जब सुदामा जी अपने घर पर आये उस समय सुदामा जी के वहां गरीबी थी अन्न धन वस्त्र की कमी थी भगवान श्री कृष्ण ने सुदामा जी के ऊपर ऐसी कृपा की द्वारिका पुरी के समान ही सुदामा पुरी बना कर दे दिया भगवान भक्त वत्सल है
अपने भक्तों पर सदैव कृपा करते हैं श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा विश्राम हुई भागवत महापुराण साक्षात भगवान श्री कृष्ण के ही स्वरुप है